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अब मोदी की पसंद का होगा देश का अगला राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति

पांच राज्यों में हुए चुनावों का परिणामों ने सिर्फ सत्ता परिवर्तन ही नहीं करवाया है, इसका असर अभी बहुत आगे तक नजर आने वाला है. केन्द्र की मोदी सरकार को ये चुनावी परिणाम बहुत ही मजबूती प्रदान करने वाले हैं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

पांच राज्यों में हुए चुनावों का परिणामों ने सिर्फ सत्ता परिवर्तन ही नहीं करवाया है, इसका असर अभी बहुत आगे तक नजर आने वाला है. केन्द्र की मोदी सरकार को ये चुनावी परिणाम बहुत ही मजबूती प्रदान करने वाले हैं. एक ओर जहां मोदी की सरकार राज्यसभा में मजबूत होगी तो वहीं दूसरी ओर अब वो अपने पसंद का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति भी चुन सकती है.

आपको बता दें कि जुलाई 2017 में देश का अगला राष्ट्रपति चुना जाना है जबकि अगले महीने अगस्त 2017 में उपराष्ट्रपति. ऐसे में यूपी और उत्तराखंड में हुई बीजेपी की बंपर जीत काफी काम करेगी और गोवा-मणिपुर में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन भी उसे सपोर्ट करेगा. साफ जाहिर है कि अब बीजेपी को विरोधी दलों को मनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

देश के बड़ राज्यों में बीजेपी सरकार
आपको बता दें कि अब बीजेपी देश के 12 बड़े राज्यों में सरकार में है. आंकड़ों की बात करें अब देश की कुल आबादी का करीब 53% हिस्से पर बीजेपी का शासन है. बीजेपी इन दिनों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा और उत्तराखंड में सत्तासीन है.

राष्ट्रपति चुनाव का पेंच
राष्ट्रपति चुनाव के लिए इलेक्टोरल कॉलेज की बात करें तो बीजेपी के नेतृत्व में बने एनडीए का वोट शेयर अभी भी बहुमत से कुछ कम रहेगा, लेकिन फिर भी वह इतना नहीं होगा कि एनडीए को यूपीए का मुंह देखना पड़े. वोटों के अंतर को एनडीए अब किसी अन्य दलों के साथ मिलकर पूरा कर लेगा. एनडीए को जरूरत है बीजेडी और एआईएडीएमके जैसे दलों को साधने कि जो फिलवक्त यूपीए में शामिल नहीं हैं.

आपको बता दें कि राष्ट्रपति का चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज ( कुल वोट 10,98,882) करता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य, केंद्रशासित दिल्ली-पुडुचेरी सहित सभी राज्यों के विधानसभा और विधानपरिषदों के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं. इन विधानसभा चुनावों से पहले एनडीए अपना राष्ट्रपति चुनने वाले बहुमत से 75 हजार 076 वोट दूर था, अब यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत के बाद अब उसे महज 20 हजार वोटों की और जरूरत होगी. इन वोटों को एनडीए बीजेडी, एआईएडीएमके और कुछ निर्दलीय सांसदों और विधायकों की मदद से आसानी से पूरी कर सकता है.

बदल जाएगी राज्यसभा की तस्वीर
2018 तक राज्यसभा की करीब 60 सीटें खाली होने वाली हैं. खाली होने वाली अधिकतर सीटें यूपी, उत्तराखंड और गोवा से होने वाली हैं. आपको बता दें कि राज्यसभा में यूपी की 11 और गोवा और उत्तराखंड की एक-एक सीट खाली होने वाली है. यूपी की 11 सीटों में अभी 7 एसपी, 2 बीएसपी व एक-एक कांग्रेस और बीजेपी के पास है. अब इनमें से अधिकतर सीटों पर बीजेपी का चेहरा होगा क्योंकि ताजा परिणामों के मुताबिक बीएसपी, कांग्रेस और सपा को अपनी सीटें छोड़नी होंगी. ये जरूर है कि हो सकता है कि सपा एक या दो और बीएसपी एक सीट पर बनी रहे.

अगले साल राज्यसभा की तस्वीर बदलते ही मोदी सरकार को अपने एजेंडे पर आगे बढ़ने में काफी आसानी होगी. अभी तक राज्यसभा में मोदी सरकार अल्पमत में थी जिस वजह से उसके कई बिल पास नहीं हो पा रहे थे. आपको बता दें कि फिलहाल राज्यसभा में यूपीए की संख्या 96 (कांग्रेस-60, एसपी-19, जेडीयू-10, डीएमके-4, आरजेडी-3) है जबकि एनडीए की 70 (बीजेपी-56, टीडीपी-6, अकाली दल-3, शिवसेना-3).

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