इन दिनों दिल्ली का हॉस्पिटेलिटी सेक्टर मंदी की जबरदस्त मार झेल रहा है. शहर के पांच सितारा होटलों के काफी कमरे खाली पड़े हैं. यहां आने वाले लोगों की संख्या में पिछले साल से 15 फीसदी की कमी आ गई है.
हॉस्पिटेलिटी कंसल्टिंग फर्म एचवीएस के मुताबिक राष्ट्रमंडल खेलों के समय (2010) दिल्ली-एनसीआर के होटलों में स्टार केटिगरी के कमरे बढ़ाए गए थे. 2007 में इनका औसत किराया 9,728 रुपये था जो कि 2011-12 में गिरकर 7,319 रह गया. है.
दरअसल पिछले कुछ सालों में दिल्ली-एनसीआर में धड़ल्ले से होटलों की संख्या बढ़ी है. जो होटल पहले से थे उनमें लग्जरी कमरों की संख्या भी काफी बढ़ा दी गई है. ओबरॉय, लीला पैलेस, वेस्टिन और हिल्टन जैसे होटलों में लग्जरी कमरों की संख्या पहले की तुलना में काफी ज्यादा है. इस संबंध में आईटीसी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर दीपक हकसर ने बताया कि होटलों के कमरों की संख्या लगातार बढ़ी है लेकिन उसी अनुपात से वहां लोग नहीं आए. नतीजतनों के किराये भी गिर गए.
कमरों के गिरते किरायों पर एक नजर
|
वर्ष |
होटलों में भरे कमरे (नई दिल्ली-एनसीआर) |
कमरे का औसत किराया |
|
2007-08 |
78% |
9,728 रुपये |
|
2008-09 |
64.8% |
6,087 रुपये |
|
2009-10 |
64.6% |
6,985 रुपये |
|
2010-11 |
59% |
6,763 रुपये |
|
2011-12 |
61.4% |
7,319 रुपये |