scorecardresearch
 

दिल्ली में कब खुलेंगे हाफ वे होम?

दिल्ली हाइकोर्ट ने साल 2009 में दिल्ली सरकार को मानसिक रोगियों के पुनर्वास के लिए हाफ वे होम्स शुरू करने का निर्देश दिया था. पांच हाफ वे होम बनकर तैयार भी हैं लेकिन इनके दरवाजे रोगियों के लिए अब तक नहीं खुले.

Advertisement
X

साल 2007 की वह शाम दिल्ली के लोगों को आज भी याद होगी जब पूर्व मॉडल गीतांजलि नागपाल खराब मानसिक हालत के कारण दक्षिण दिल्ली के हौज खास इलाके में फुटपाथ पर गुजर बसर करती मिली थी. इस घटना के बाद दिल्ली हाइकोर्ट ने 2009 में मानसिक रोगियों और अकेली महिलाओं के सिर पर छत मुहैया करवाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार को ‘हाफ वे होम्स’ या पुनर्वास केंद्र बनाने का आदेश दिया था.

लेकिन आज नौ साल बाद कुछ नहीं बदला. दिल्ली की सड़कों पर जगह-जगह आज भी अपने जीवन के लिए संघर्ष करते मानसिक रोगी देखे जा सकते हैं. हालांकि दिल्ली की मेंटल रिसर्च सोसाइटी इस किस्म का ‘तुलसी होम’ नाम से पुनर्वास केंद्र चलाती है. तुलसी होम से जुड़े मनोविज्ञानी  डॉ. चंद्रशेखर गुप्ता कहते हैं, ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेघर लोगों की तादाद में तेजी से इजाफा हो रहा है. ऐसे लोगों के लिए लिए पुनर्वास केंद्र की सख्त जरूरत है जहां वे सामान्य जीवन जीना सीखना शुरू कर सकते हैं.

तुलसी होम दिल्ली के उन चुनिंदा हाफ वे होम्स में शामिल है जहां शित्जोफ्रेनिया, डिमेंशिया और बायपोलर जैसी मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों को आसरा दिया जाता है. लेकिन यहां भी सीमित संख्या में ही रोगियों को रखा जा सकता है, जो ऐसे पीड़ितों की संख्या को देखते हुए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में मौजूद मानसिक रोगियों में से एक चौथाई बेघर हैं. फिलहाल दिल्ली में ऐसे पांच हाफ वे होम रोहिणी, नरेला, द्वारका में बनकर तैयार हैं. लेकिन इन्हें अभी तक बेघरों और मानसिक रोगियों के लिए खोला नहीं गया है. डॉ. गुप्ता कहते हैं, ‘‘दिल्ली-एनसीआर में मानसिक रूप से अस्वस्थ बेघर के लिए मानसिक अस्पताल और पुनर्वास केंद्र बहुत कम हैं. जो हैं वे उनमें भी क्षमता से अधिक लोग रह रहे हैं. पहले सामाजिक संगठन और रोगियों के परिवार ही उनका ध्यान रख लेते थे लेकिन आजकल परिवार छोटे होने लगे हैं ऐसे में लोग मानसिक रूप से अस्वस्थ परिजनों की देखभाल नहीं करना चाहते. यही वजह है कि इस तरह के ज्यादा लोग सड़कों पर घूमते दिखाई देने लगे हैं. बहुत कम लोग होते हैं जिन्हें पूरा उपचार मिल पाता है.’’

मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के लिए डे-केयर सेंटर चलाने वाली संजीवनी सोसाइटी फॉर मेंटल हैल्थ से जुडे फोर्टिस अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. पुनीत द्विवेदी कहते हैं, ‘‘गंभीर मानसिक बीमारियों से के पीड़ितों के लिए ऐसे हाफ-वे होम की बहुत जरूरत है. इस किस्म के सरकारी पुनर्वास केंद्र तो हैं ही नहीं, निजी हैं भी तो उनकी संख्या बहुत कम है. दिल्ली में सरकारी हाफ वे होम की इमारत बन कर तैयार है लेकिन इन्हें अभी शुरू नहीं किया गया है.’’

Advertisement
Advertisement