जहां कई लोग आलस और व्यस्तता के कारण योग नहीं करते हैं वहीं कई ऐसे भी लोग हैं जिन्हें लगता है कि योग सिर्फ हिंदू धर्म का हिस्सा है. उन्हें लगता है कि योग करने से वे अपने धर्म के प्रति वफादार नहीं रह जाएंगे.
ये सोचना सरासर गलत है. ऐसा इसलिए क्योंकि योग कोई धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने की एक वैज्ञानिक कला है. सद्गुरु तर्क देते हैं कि हिंदुओं ने इसकी खोज तो की है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि योग भी हिंदू हो गया. इस आधार पर तो न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम को ईसाई होना चाहिए.
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पतंजलि के अनुसार योग की परिभाषा है-“योगश्चित्तवृतिनिरोध:” अर्थात पतंजलि के अनुसार चित की वृतियों का निरोध ही योग कहलाता है." योग का धर्म से कोई लेना देना है इसका कहीं कोई जिक्र नहीं मिलता है.
हमारे देश में राफिया नाज़ जैसे उदाहरण मौजूद हैं जिन्होंने योग को अपनाया. हालांकि झारखंड में योग सिखाने वाली राफिया को कुछ अराजक तत्वों ने परेशान करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने योग नहीं छोड़ा.
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योग को आज विश्व स्तर पर पहचान मिल चुकी है. दुनियाभर के लोगों के बीच योग मशहूर है. हर वर्ष हजारों की संख्या में विदेशी योग सीखने के लिए भारत आते हैं. योग कोई भी सीख सकता है. इसका आपके स्वास्थ्य से लेना-देना है धर्म से बिल्कुल नहीं.