राज्यसभा के बाद मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पेश किया. इस बिल पर चर्चा के दौरान डीएमके ने विरोध जताया. डीएमके सांसद टीआर बालू ने कहा कि हम अघोषित आपातकाल की स्थिति में हैं.
उन्होंने कहा कि 'मुझे नहीं पता कि मेरा दोस्त फारूक अब्दुल्ला कहां है? पता नहीं हाउस अरेस्ट में है या नहीं. हम नहीं जानते उमर और महबूबा मुफ्ती कहां हैं.' बता दें कि इस बिल को लेकर सोमवार को राज्यसभा में भी कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके के सांसदों ने हंगामा किया था.
वहीं, लोकसभा में कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर को 2 हिस्सों में तोड़कर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया. उन्होंने कहा कि कश्मीर को आप अंदरूनी मामले बताते हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र वहां की निगरानी करता है. इस पर अमित शाह ने कहा कि यह कांग्रेस का मत है कि संयुक्त राष्ट्र जम्मू कश्मीर की निगरानी कर सकता है. चौधरी ने कहा कि यह मुद्दा द्विपक्षीय है या अंतरराष्ट्रीय, इस पर सरकार अपना पक्ष साफ करे. वहां लाखों की तादाद में सेना तैनात है और पूर्व मुख्यमंत्री नदरबंद हैं, घाटी के हालात हमें पता नहीं चल पा रहे हैं.
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष जो भी पूछेगा उसका जवाब देंगे, लेकिन पहले मुझे अपनी बात रखने दीजिए. उन्होंने कहा कि धारा 373 (3) का उपयोग कर राष्ट्रपति इसे सीज कर सकते हैं, लेकिन राष्ट्रपति तभी ये नोटिफिकेशन निकाल सकते हैं जब जम्मू कश्मीर संविधान सभा की अनुशंसा हो.
उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का उपयोग कांग्रेस 1952 और 1955 में कर चुकी है. महाराजा के लिए पहले सदर ए रियासत और फिर 1965 में इसे गवर्नर किया. आज कांग्रेस हल्ला कर रही है, लेकिन राष्ट्रपति इसका उपयोग कर चुके हैं जिसपर सरकार की अनुशंसा मिली थी. जम्मू कश्मीर में विधानसभा नहीं चल रही है और ऐसे में इसी संसद में जम्मू कश्मीर के सारे अधिकार निहित हैं.