सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस के आरोपी गुजरात के पूर्व DIG डी जी वंजारा ने इंडियन पुलिस सर्विस से इस्तीफा दे दिया है. वंजारा ने गुजरात सरकार को 10 पन्नों की चिट्ठी लिखी है, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके करीबी अमित शाह पर निशाना साधा है.
मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए वंजारा ने लिखा है कि वे और उनके साथ काम करने वाले पुलिस अधिकारी संकट के दौरान एक बांध की तरह सरकार के साथ खड़े रहे, लेकिन उनके संकट के दौरान सरकार ने निराश किया.
उन्होंने आरोप लगाया है कि गुजरात सरकार ने जेल में बंद पुलिस अधिकारियों की कोई मदद नहीं की. सिर्फ जुबानी जमाखर्च से काम चलाया जा रहा है, जो खोखली साबित हुई. मोदी सरकार सीबीआई से सिर्फ अपनी चमड़ी बचाने में जुटी है और मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठा रही है. जबकि अमित शाह की गिरफ्तारी के बाद सरकार तुरंत हरकत में आ गई थी.
अब अमित शाह सहित मोदी सरकार पर भरोसे की कोई वजह नहीं
डीजी वंजारा ने लिखा है, 'अमित शाह पर जब केस चला तो उन्हें बचाने में पूरी राज्य सरकार लग गई. उनके लिए जेठमलानी जैसे वकील बुलाए गए. अमित शाह ने अपने मुकदमे ट्रांसफर करवा लिए और हमें जेल में पड़े रहने के लिए मजबूर कर दिया. मैं और मेरे अफसरों ने सरकार के रवैये से ठगा हुआ महसूस किया. अब अमित शाह सहित मोदी सरकार पर भरोसे की कोई वजह नहीं है.'
मेरे लिए भगवान थे मोदी पर अब नहीं...
वंजारा ने लिखा है, 'मैं आज तक इस मुद्दे पर इसलिए चुप रहा क्योंकि मेरा विश्वास राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के प्रति अडिग था. गुजरात के मुख्यमंत्री को मैं भगवान मानता था. पर बड़े दुख के साथ कह रहा हूं कि मेरा यह भगवान जरूरत के वक्त पर मेरे साथ नहीं खड़ा था. इसकी वजह अमित शाह हैं, जिन्होंने पिछले 12 सालों से मोदी को गुमराह किया है.'
हमारे कारण बहादुर कहलाए मोदी, पर भूल गए हमारा कर्ज चुकाना
वंजारा ने लिखा है, 'मोदी सही कहते हैं कि उन्हें भारत माता का कर्ज चुकाना है. पर वो दिल्ली जाने की जल्दबाजी में जेल में बंद पुलिसकर्मियों का कर्ज चुकाना भूल गए. मोदी उन सभी पुलिसकर्मियों का कर्ज चुकाना भूल गए जिन्होंने मोदी बहादुर मुख्यमंत्री का तमगा दिलवाया.'
गुजरात में पुलिस की हालत सबसे खराब
वंजारा ने लिखा है, 'मेरी जानकारी में देश का कोई ऐसा राज्य नहीं है जहां पर इतने सारे पुलिसकर्मी गिरफ्तार किए गये या फिर हो रहे हैं, वो भी इतने लंबे वक्त से. सबसे अहम बात यह कि राज्य का निष्ठावान सिपाही होने के बावजूद उन पुलिसकर्मियों को जेल में टॉर्चर किया जा रहा है. हमने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का सामना पूरी ईमानदारी और जवाबदेही से किया था.'