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दूसरी 'निर्भया' को भी मिला इंसाफ, दिल्ली गैंगरेप के दरिंदों को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा

दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने छावला से अगवा की गई किरण नेगी के साथ हुए गैंगरेप के मामले के तीनों दोषियों रवि, राहुल और विनोद को फांसी की सजा सुनाई है. कोर्ट ने 13 फरवरी को तीन आरोपियों को दोषी ठहराया था.

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पीड़िता के पिता ने की थी फांसी की मांग
पीड़िता के पिता ने की थी फांसी की मांग

दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने छावला से अगवा की गई किरण नेगी के साथ हुए गैंगरेप के मामले के तीनों दोषियों रवि, राहुल और विनोद को फांसी की सजा सुनाई है. कोर्ट ने 13 फरवरी को तीन आरोपियों को दोषी ठहराया था.

यह मामला भी निर्भया कांड जैसा ही वहशियाना है. घटना फरवरी, 2012 की है, जब तीनों दोषियों ने दफ्तर से लौटते वक्त किरण को अगवा कर लिया था और गुड़गांव ले जाकर न सिर्फ उससे रेप किया, बल्कि उसके शरीर को सिगरेटों से दागा, शरीर पर बीयर की टूटी बोतल से चीरे लगाए, आंखों में एसिड डाला, गुप्तांगों को गर्म औजारों से जलाया और उसमें शराब की बोतल डाल दी. इसके बाद इन तीनों आरोपियों ने किरण को रेवाड़ी में मरने के लिए छोड़ दिया. उसका परिवार करीब एक साल से दिल्ली के जंतर−मंतर पर इंसाफ के लिए प्रदर्शन कर रहा था. इस प्रदर्शन में शामिल लोगों ने भी आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी.

दिल्ली पुलिस ने भी मामले को 'रेयरस्ट ऑफ रेयर' बताते हुए दोषियों के लिए फांसी की मांग की थी, जबकि बचावपक्ष ने उनकी उम्र और सामाजिक हालात देखते हुए उन्हें उम्रकैद सुनाने की अपील की थी. दोषियों पर आईपीसी की धारा 376 (2), 302, 363 और 201 के तहत आरोप दर्ज किए गए थे. पीड़िता के मां-बाप ने दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी.

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पूरी घटना का ब्यौरा
फरवरी 2012 में छावला की रहने वाली 19 साल की किरण अपने कुछ दोस्तों के साथ गुड़गांव से घर लौट रही थी. इसी वक्त तीन बदमाशों उसे कार में जबरन अगवा कर ले गए. इस वारदात के बाद उसके घरवालों को तब पहला झटका लगा, जब तकरीबन एक घंटे देर से पहुंची पुलिस ने तमाम गुजारिश के बावजूद फुर्ती से बदमाशों की तलाश करने से खुद को मजबूर बता दिया. वजह यह कि राजधानी की पुलिस के पास बदमाशों को ढूंढ़ने निकलने के लिए एक अदद गाड़ी तक नहीं थी.

इधर, जितना वक़्त गुजर रहा था, अगवा की गई लड़की के साथ ज्यादती बढ़ती जा रही थी. किरण को उठाने के बाद बदमाश उसे कार में लेकर अंदरुनी रास्तों से होते हुए दिल्ली से हरियाणा जा पहुंचे. चूंकि ये सारे के सारे लड़के वहीं के रहने वाले और पेशे से ड्राइवर थे, इन्हें पुलिस से बचने के लिए कई दूसरे रास्तों का पता था. दोषियों ने पहले तो एक ठेके से रूक कर शराब खरीदी और फिर कार को सुनसान जगह पर ले जाकर शराब पीते हुए किरण के साथ ज्यादती की.

बदहवास किरण ने पीने के लिए पानी मांगा, तो इन सिरफिरों का एक और चेहरा सामने आ गया. पहले तो तीनों उसे लेकर पानी की तलाश में निकले और एक जगह रखे घड़े से पानी भी पिलाया लेकिन इसके बाद इन तीनों में से एक लड़के के दिमाग़ में जो बात आई, उसने अब तक बलात्कारी बन चुके इन लड़कों को क़ातिल भी बना दिया.

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एक मासूम की अस्मत तार-तार करने के बाद पहले तो इन लड़कों ने उसे पानी पिलाया और इसी बीच जब एक ने उसे मार डालने का आइडिया दिया, तो तीनों की हैवानियत फिर से जाग उठी. इन लड़कों ने उसे जिस घड़े से पानी पिलाया था, सबसे पहले वही घड़ा उठा कर उसके सिर पर दे मारा और इसके बाद तीनों ने लड़की के साथ जो कुछ किया, उसे सुनते ही किसी को भी उसकी दर्द की शिद्दत का अहसास होने लगेगा.

तीनों में से एक मुड़ा और गाड़ी से लोहे का पाना और जैक निकाल लाया और इन्हीं औजारों से उन्होंने लड़की के सिर पर कई ज़ोरदार वार किए. लड़की पहली ही वार से लड़की जमीन पर गिर कर तड़पने लगी लेकिन लड़कों को उस पर रहम नहीं आई. इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक उस पर ना सिर्फ़ कई वार किए, बल्कि उसकी लाश को जला कर बदशक्ल करने के लिए गाड़ी के साइलेंसर से औजारों को गर्म कर उसे जगह-जगह दागा.

लेकिन वहशत की इंतहा अभी बाकी थी. इसके बाद लड़कों ने बीयर की बोतल फोड़ी और उससे लड़की के पूरी जिस्म को तब तक काटते रहे, जब तक वो बेजान नहीं हो गई. पुलिस के सामने खुद लड़कों का कुबूलनामा यह कहता है कि उन्होंने तसल्ली के लिए कई वार तो उसकी मौत के बाद भी किए और फिर लाश को मौके पर ही छोड़ कर भाग निकले. लेकिन आखिरकार, पुलिस को उनकी कार की मेक और मोबाइल फ़ोन की लोकेशन की बदौलत पहले सुबूत मिले और दोषियों को धर दबोचा गया.

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