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सिब्बल को मिला कानून मंत्रालय, जोशी बने नए रेल मंत्री

मनमोहन मंत्रिमंडल के दो मंत्रियों अश्वनी कुमार और पवन कुमार बंसल के इस्तीफा दे देने के बाद दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को विधि मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्री सीपी जोशी को रेलवे का अतिरिक्त प्रभार मिल गया है.

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कपिल सिब्बल
कपिल सिब्बल

मनमोहन मंत्रिमंडल के दो मंत्रियों अश्वनी कुमार और पवन कुमार बंसल के इस्तीफा दे देने के बाद दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को विधि मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्री सीपी जोशी को रेलवे का अतिरिक्त प्रभार मिल गया है.

राष्ट्रपति भवन के एक बयान में इसकी घोषणा की गयी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को इस बदलाव के बारे में सिफारिश की थी. राष्ट्रपति ने कुमार एवं बंसल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है.

रेल मंत्री बंसल ने अपने भांजे विजय सिंगला के पिछले हफ्ते गिरफ्तार होने के बाद शुक्रवार को इस्तीफा दिया था. सिंगला को रेलवे बोर्ड में पदोन्नति दिलाने के लिए कथित रूप से 90 लाख रूपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

कोयला ब्लॉक आवंटन में घोटाले संबंधी सीबीआई जांच में हस्तक्षेप को लेकर चल रहे विवाद के चलते अश्विनी कुमार ने इस्तीफा दिया. प्रख्यात वकील सिब्बल को कानून मंत्रालय का काम देखने का पहली बार मौका मिलेगा जबकि जोशी को इससे पहले भी पिछले साल रेल मंत्रालय का प्रभार अस्थायी तौर पर तब दिया गया था जब तृणमूल कांग्रेस नेता मुकुल राय ने उनकी पार्टी द्वारा यूपीए सरकार से हटने के बाद त्यागपत्र दे दिया था.

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बयान में कहा गया, ‘भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्री परिषद के निम्न सदस्यों का त्यागपत्र तुरंत प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. पवन कुमार बंसल एवं अश्वनी कुमार.’ इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने रेल मंत्रालय तथा कानून एवं विधि मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार क्रम से डॉ. सीपी जोशी एवं कपिल सिब्बल को दिये जाने का निर्देश दिया है.

मंत्रालयों में यह बदलाव इन अटकलों के बावजूद हुआ है कि केंद्रीय मंत्रियों के विभागों में फेरबदल हो सकता है ताकि डीएमके के सरकार से हटने के बाद खाली हुई जगहों तथा अतिरिक्त प्रभार वाले मंत्रियों की जगह नये लोगों को प्रभार दिया जा सके. क्यों देना पड़ा अश्विनी कुमार को इस्तीफा?
लाखों-करोड़ों रुपये के कोयला घोटाले में सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट में बदलाव कराना कानून मंत्री को महंगा पड़ा. इसी साल 8 मार्च को कोयला घोटाले में सीबीआई का एक हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाना था. कहीं वो हलफनामा सरकार के गले की हड्डी ना बन जाए, इसलिए उससे पहले ही चार दौर की ऐसी हाइप्रोफाइल बैठकें हुईं, जिसमें से दो में खुद कानून मंत्री मौजूद थे.

इसी साल फरवरी मं एक दिन कानून मंत्री अश्विनी कुमार, अटॉर्नी जनरल जी ई वाहनवती, सीबाई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा और तत्कालीन एडिश्नल सॉलिसीटर जनरल हरिन रावल की एक गुप्त बैठक कानून मंत्री के दप्तर में हुई. सुप्रीम कोर्ट ने 24 जनवरी को कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में सीबीआई जांच पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी. उस बैठक में तय किया गया कि मामले को गुप्त रखने के लिए सीबीआई की रिपोर्ट को हलफनामे के रूप में भेजने की जगह एक सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाएगा.

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लेकिन कानून से खिलवाड़ करने में कानून मंत्री इतने पर नहीं रुके. 6 मार्च को कानून मंत्री के दफ्तर में एक बार फिर अश्विनी कुमार, अटॉर्नी जनरल जी ई वाहनवती, सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा, तत्कालीन एडिश्नल सॉलिसीटर जनरल हरिन रावल, सीबीआई के ज्वाइंट सेक्रेट्री ओ पी गलहोत्रा और सीबीआई के डीआईजी रविकांत की बैठक हुई. अश्विनी कुमार ने वहां स्टेटस रिपोर्ट में कुछ बदलाव के सुझाव दिए. मंत्रीजी का हुक्म मानते हुए स्टेटस रिपोर्ट से स्क्रीनिंग कमेटी के कुछ चार्ट हटा दिए गए.

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सरकार को कड़ी फटकार लगायी. कांग्रेस और सरकार पहले तो अश्विनी कुमार का बचाव करते रहे, लेकिन पानी सिर के ऊपर जा पहुंचा, तो मंत्रीजी की कुर्सी की कुर्बानी लेनी पड़ी. मनमोहन सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं पवन कुमार बंसल और अश्विनी कुमार, लेकिन इत्तेफाक देखिए कि प्रधानमंत्री के दोनों करीबी मंत्रियों को एक साथ जाना पड़ा.

क्यों पटरी से उतरी रेल मंत्री की कुर्सी?
3 मई को शुरु हुए हाईप्रोफाइल सियासी ड्रामे का अंत 10 मई को हो ही गया. सबसे पहले पवन बंसल का भांजा विजय सिंगला रिश्वत लेते रंगों हाथों गिरफ्तार हुआ, और फिर बाद में उसकी लपटों में पवन बंसल भी घिरते चले गए. घूस की चिंगारी से उठी आग ने पवन बंसल को भी झुलसा दिया. 3 मई की रात को सीबीआई के बड़े खुलासे और कार्रवाई के बाद उठे बवंडर ने बवाल मचा दिया. एक सप्ताह की उठापठक के बाद पवन बंसल को इस्तीफा देने के लिए आखिरकार कांग्रेस हाईकमान को कहना ही पड़ा.

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आरोपों की कड़ी पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला से शुरु हुई जिसका एक सिरा बाद में मामा पवन बंसल से भी जुड़ता गया. 3 मई को ही सीबीआई ने चंडीगढ़ और मुंबई में चार लोगों को गिरफ्तार किया. मामला रेल मंत्रालय में करोडों के घूसकांड से जुड़ा है और पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला को सीबीआई ने 90 लाख की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया. सीबीआई के मुताबिक विजय सिंगला और रेलवे बोर्ड मेंबर महेश कुमार के बीच 10 करोड़ रुपए की डील हुई थी जिसके मुताबिक विजय सिंगला ने महेश कुमार को रेलवे बोर्ड मेंबर इलेक्ट्रिकल बनवाने का वादा किया था.

इसी डील के तहत 3 मई को सीबीआई ने रिश्वत की पहली किश्त के तौर पर 90 लाख रुपए जब्त किए. पवन बंसल और महेश कुमार के बीच भी कई बार मुलाकात के सबूत सामने आ चुके हैं. 7 अप्रैल को दिल्ली में मिले थे पवन बंसल और महेश कुमार, जबकि 17 अप्रैल को भी मुंबई में पवन बंसल और महेश कुमार के बीच मुलाकात की जानकारी सामने आ चुकी है. जीएम से रेलवे बोर्ड मेंबर बनने के क्रम में भी महेश कुमार को वक्त से पहले प्रमोशन मिला और सूत्रों के मुताबिक इस प्रमोशन में भी पवन बंसल की सिफारिश काम आई थी. इतना ही नहीं पवन बंसल के निजी सचिव और विजय सिंगला के बीच फोन पर 40 बार बात हुई थी जिसमे महेश कुमार से जुड़ा मुद्दा सबसे अहम था.

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इस्तीफे के बाद अश्विनी कुमार की सफाई
कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देने के अगले दिन ही प्रेस कॉन्फ्रेस बुलाने वाले अश्विनी कुमार ने कहा कि विवादों को खत्म करने के लिए उन्होंने इस्तीफा दिया. अश्विनी कुमार ने साथ ही कहा कि उन्हें झूठा ही फंसाया जा रहा है.

अश्विनी कुमार ने कहा, 'कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार विवाद हो रहा है. बेवजह विवादों को खत्म करने के लिए मैंने शुक्रवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया.' उन्होंने इस्तीफे पर अपनी सफाई देते हुए कहा, 'मेरी आत्मा साफ है. मुझे यकीन है कि सचाई की जीत होगी.'

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बारे में पूर्व कानून मंत्री ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने मेरे खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की थी.' अश्विनी कुमार के मुताबिक, 'कांग्रेस का सिपाही होने पर मुझे गर्व है. मुझे सारे नेताओं का समर्थन है. बेकार के मुद्दों पर सियासत हो रही है. मेरे साथियों ने हमेशा मेरा साथ दिया है. मैं प्रधानमंत्री के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा'

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