आंध्र प्रदेश में हुए हालिया विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद सत्ता से बाहर हुए चंद्रबाबू नायडू की लगातार मुसीबत बढ़ रही है. वाईएसआर कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने पहले नायडू परिवार की भारी-भरकम सिक्योरिटी हटाई और अब उनकी ओर से बनवाई गई बिल्डिंग 'प्रजा वेदिका' को भी तोड़ दिया. सूत्र बता रहे हैं कि अभी तो यह शुरुआत है. आने वाले समय में नायडू की मुसीबतें और बढ़ने वाली हैं. सूत्र बता रहे हैं कि अब केंद्र से भी उन्हें मदद नहीं मिलने वाली है. क्योंकि अगर वह एनडीए से सिर्फ नाता तोड़ते तो गनीमत थी, मगर उन्होंने विरोध में कई कदम आगे जाकर मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की भी पहल कर दी.
कैश फॉर वोट मामले में तेलंगाना की केसीआर सरकार 2015 से ही उनके पीछे पड़ी है. इधर, सत्ता में आने के बाद से जगन मोहन रेड्डी लगातार एक्शन में है. शपथ लेने के तुरंत बाद सीएम जगन ने नायडू सरकार की ओर से कार्यकाल के आखिरी दिनों में शुरू हुई करोड़ों की परियोजनाओं पर रोक लगाते हुए जांच शुरू करा दी है. इतना ही नहीं, सीबीआई आदि केंद्रीय जांच एजेंसियों के पास पहले से उनके खिलाफ शिकायतें हैं. ऐसे में नायडू चौतरफा घिर चुके हैं. पुराने मामले अगर खुले तो उन पर गिरफ्तारी की भी तलवार लटक सकती है. सीबीआई के पास मौजूद कुछ शिकायतों पर भी नायडू के खिलाफ जांच आगे बढ़ सकती है.
बताया जा रहा है कि इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सरकार बनने के बाद राज्य की सीमा में सीबीआई के घुसने पर लगी वह रोक भी हटा दी, जिसे नायडू ने पिछले साल एनडीए से अलग होने के बाद लगाया था. नायडू को आशंका थी कि सीबीआई या अन्य केंद्रीय एजेंसियां शिकायतों पर राज्य में उनके या पार्टी नेताओं के खिलाफ छापेमारी कर सकती हैं. YSR कांग्रेस पार्टी के नेता विजयसाईं रेड्डी हाल में कह चुके हैं, ‘चंद्रबाबू ने सीबीआई पर रोक लगा दी थी, उन्हें आयकर विभाग के छापे का डर था और ईडी के सवालों से भी वह घबराते थे. मगर हमें ऐसा कोई डर नहीं है.'
बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव बोले- जाएंगे जेल
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय सचिव और आंध्र प्रदेश के सह प्रभारी सुनील देवधर aajtak.in से बातचीत में कहते हैं कि नायडू और उनके बेटे के खिलाफ भ्रष्टाचार की कई शिकायतें हैं. पिता-पुत्र दोनों जेल जाएंगे. सुनील देवधर का दावा है कि कैश फॉर वोट सहित अन्य कई मामलों में में फंसे होने के कारण जब चंद्रबाबू नायडू को लगा कि वह कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं तो वह हैदराबाद में राजधानी का पूरा सेटअप छोड़कर अमरावती चले गए. देवधर के मुताबिक, नायडू की ओर से इतनी जल्दी अमरावती को राजधानी बनाने के पीछे और कोई वजह नहीं थी.
खुद को सेफ करने के लिए पहले उन्होंने तेलंगाना की सीमा से बाहर अमरावती में राजधानी शिफ्ट की, फिर पिछले साल आंध्र प्रदेश की सीमा में सीबीआई के घुसने पर भी रोक लगा दी. सुनील देवधर के मुताबिक, आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद हैदराबाद तेलंगाना के खाते में आया. उस दौरान तय हुआ था कि नई राजधानी बनने तक दस साल के लिए हैदराबाद ही दोनों प्रदेशों की राजधानी रहेगी. आंध्र प्रदेश सरकार चाहती तो नई राजधानी तैयार न होने की बात कहकर 10 साल से ज्यादा समय के लिए भी हैदराबाद को ही राजधानी बनाए रख सकती थी. मगर दस साल की बात छोड़िए, नायडू कुछ ही समय में अमरावती चले गए. ताकि वह तेलंगाना की सीमा से दूर हो जाएं.
क्या है कैश फॉर वोट मामला
2015 में तेलंगाना विधान परिषद का चुनाव था. इस दौरान कैश फॉर वोट मामला सुर्खियों में आया था. इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री और टीडीपी मुखिया चंद्रबाबू नायडू का तेलंगाना के एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक कथित टेप जारी किया था. जिसमें अपने उम्मीदवार को वोट देने के लिए टीआरएस सदस्य को 50 लाख रुपये की घूस ऑफर करने का उनका ऑडियो वायरल हुआ. इस घटना के बाद सीएम केसीआर के आदेश पर तेलंगाना की एसीबी ने चंद्रबाबू नायडू की भूमिका को लेकर जांच शुरू की थी. खुद सीएम केसीआर इस केस की जांच की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा कर चुके हैं.
YSR कांग्रेस कर चुकी है सीबीआई में शिकायत
2013 में आय से अधिक संपत्तियों के मामले में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने सीबीआई की प्रारंभिक जांच के आदेश दिए थे. हाई कोर्ट उनकी पत्नी भुवनेश्वरी की संपत्तियों की भी जांच के आदेश दे चुका है. मौजूदा समय सत्ता में आई वाईएसआर कांग्रेस ने पिछले साल विपक्ष में रहने के दौरान नायडू के बेटे नारा लोकेश के खिलाफ आंध्र प्रदेश में 80 एकड़ सरकारी जमीन हथियाने को लेकर सीबीआई में शिकायत की थी.
सितंबर, 2018 में एक रिटायर्ड जज श्रवण कुमार ने नायडू और उनके बेटे नारा लोकेश के खिलाफ आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल कर जांच की मांग की थी. आरोप लगाया था कि नायडू ने अपनी सरकार में इनवेस्टमेंट के नाम पर फर्जी एमओयू किया. रिटायर्ड जज ने 21 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया था. हालांकि हाई कोर्ट की ओर से और डिटेल्स मांगे जाने पर यह पीआईएल वापस ले ली गई थी. सूत्र बता रहे हैं कि जगन मोहन रेड्डी की ओर से नायडू परिवार के खिलाफ एक्शन अभी तो शुरुआत है. आने वाले वक्त में नायडू परिवार के खिलाफ और एक्शन लिए जा सकते हैं.