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कोरोना वायरस: तेजी से रेड जोन में बदल रहे हैं ग्रीन जोन वाले जिले

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलीजेंस यूनिट ने 717 जिलों को रेड जोन, ऑरेंज जोन और ग्रीन जोन में वर्गीकृत करके उनका विश्लेषण किया. 1 अप्रैल तक 717 जिलों में से केवल एक प्रतिशत जिलों में 50 या इससे ऊपर कोरोना के मामले दर्ज किए गए थे.

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तेजी से रेड जोन में बदल रहे हैं ग्रीन जोन वाले जिले (फोटो- PTI)
तेजी से रेड जोन में बदल रहे हैं ग्रीन जोन वाले जिले (फोटो- PTI)

  • 2 जून तक 50 या इससे ज्यादा केस वाले 345 जिले रेड जोन में
  • एक अप्रैल 2020 तक ऐसे जिलों की संख्या सिर्फ छह थी

भारत में कोविड-19 से प्रभावित रेड जोन जिलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. 2 जून तक 50 या इससे ज्यादा केस वाले 345 जिले रेड जोन में आ चुके हैं, जबकि 1 अप्रैल तक ऐसे जिलों की संख्या सिर्फ छह थी.

आंकड़े कहते हैं कि पिछले दो महीनों में ऐसे जिलों की संख्या में 87 प्रतिशत की कमी आई है जो कोरोना मुक्त हैं. इन जिलों की संख्या 498 से घटकर अब सिर्फ 64 बची है.

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने 717 जिलों को रेड जोन (50 या इससे ज्यादा मामले), ऑरेंज जोन (1 से 49 मामले), और ग्रीन जोन (शून्य मामले) में वर्गीकृत करके उनका विश्लेषण किया.

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1 अप्रैल तक 717 जिलों में से केवल एक प्रतिशत जिलों में 50 या इससे ऊपर कोरोना के मामले दर्ज किए गए थे. जबकि ठीक दो महीने के बाद, देश के लगभग आधे जिले रेड जोन में बदल गए हैं. ग्रीन जोन वाले जिलों का रेड जोन में बदलने का प्रतिशत 5,600 फीसदी है. 1 अप्रैल तक केवल छह जिलों में 50 या उससे अधिक कोरोना वायरस के मामलों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जबकि यह संख्या 2 जून को बढ़कर 345 हो गई है.

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जिला-वार आंकड़ों से पता चलता है कि रेड जोन में 98 फीसदी और ऑरेंज जोन में 43 फीसदी तक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. दो महीने पहले देश में ग्रीन जोन 69 फीसदी थे. अब यह संख्या घटकर 9 फीसदी हो गई है. इस अवधि में ज्यादातर जिले जो ग्रीन जोन थे, अब रेड जोन में आ गए हैं. ऑरेंज जोन वाले जिलों की संख्या भी 213 से बढ़कर 304 हो गई है.

महाराष्ट्र में तीन सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं- मुंबई, पुणे और ठाणे. मुंबई देश का सबसे बुरी तरह प्रभावित जिला है, इसके बाद चेन्नई, अहमदाबाद, ठाणे और पुणे आते हैं. भारत में 2 जून तक कोरोना वायरस के जितने मामले दर्ज हुए हैं, उसका लगभग आधा यानी 90 हजार केस इन पांच जिलों में दर्ज किए गए हैं.

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पिछले एक सप्ताह में भारत के लगभग 15 प्रतिशत जिलों में कोरोना वायरस के मामलों में 100 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है. संख्या के ​लिहाज से इन जिलों में कोरोना के मामले संख्या में ज्यादा नहीं हैं, लेकिन केस में बढ़ोत्तरी का प्रतिशत बहुत अधिक है.

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उदाहरण के लिए, असम के डिब्रूगढ़ जिले में पिछले सात दिनों में कोरोना वायरस के केस 1 से बढ़कर 32 हो गए. प्रतिशत के लिहाज से यह 3100 फीसदी की वृद्धि है जो कि सभी जिलों में सबसे ज्यादा है. इसके बाद छत्तीसगढ़ के जशपुर में 3 से बढ़कर 41 केस हो गए. यह 1267% की बढ़ोत्तरी है. जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले में 2 से बढ़कर 27 केस हो गए, यह 1250% है. त्रिपुरा के सिपाहीवाला में 5 से बढ़कर 47 केस हुए, यह 900% है. पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में 1 केस से बढ़कर 9 हो गए. यह 800% की बढ़ोत्तरी है.

विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि दूरस्थ इलाकों में इस बढ़ोत्तरी के पीछे एक कारण यह है कि मुंबई और दिल्ली जैसी जगहों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घर लौटे हैं.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक औसत (6.13 फीसदी) की तुलना में, भारत में कोरोना केस की मृत्यु दर कम (2.8 फीसदी) है.

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इस वायरस के लिए वैक्सीन अब भी उपलब्ध नहीं है. इस बीच, सरकार ने आपातकालीन स्थिति में औपचारिक क्लिीनिकल ट्रायल के तौर पर एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिविर नाम की दवा को अनुमति दे दी है. यह दवा गिलियड साइंसेज इंक का उत्पाद है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, "द सेंट्रल ड्रग कंट्रोल स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (CDCSO) ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कोविड-19 रोगियों के उपचार के लिए आपातकालीन उपयोग की अनुमति दी है. कोविड-19 के रोगियों के उपचार के लिए आपातकालीन उपयोग के तौर पर रेमडेसिविर को मंजूरी दी गई है. क्या प्रोटोकॉल है, क्या डोज देना है, इसके संदर्भ में अभी मेरे पास जानकारी उपलब्ध नहीं है. कुछ विशेष संगठन साक्ष्य जुटाते हैं और उसी के आधार पर दवा के उपयोग की अनुमति दी जाती है."

(नोट: हमने 2 जून तक के वास्तविक आंकड़ों को शामिल करने की पूरी कोशिश की है, लेकिन कोरोना वायरस की अस्थिर व गतिशील प्रकृति के कारण आंकड़ों में थोड़ा बहुत अंतर संभव है.)

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