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संविधान पीठ करेगी मेडिकल कॉलेजों को राहत देने के लिए हुए घूसखोरी केस की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब पहले ही एक याचिका दाखिल हो गई थी तो दूसरी याचिका दाखिल करने की ज़रूरत क्या थी?

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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के नाम पर मेडिकल कालेज़ों को राहत के मामले में एक और याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को होने वाली पांच जजों की संविधान पीठ के पास सुनवाई के लिए भेज दिया है, लेकिन कोर्ट दूसरी याचिका दायर करने से नाराज़ भी हुआ. जस्टिस एके सीकरी के कोर्ट में सवाल जवाब खासे दिलचस्प थे और कोर्ट की टिप्पणियां भी गंभीर.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब पहले ही एक याचिका दाखिल हो गई थी तो दूसरी याचिका दाखिल करने की ज़रूरत क्या थी? हालांकि कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और इन पर विचार जरूरी है. याचिकाकर्ता की ओर से प्रशांत भूषण ने कहा कि CJI को इस मामले में कोई न्यायिक आदेश या प्रशासनिक आदेश जारी ना करें, लेकिन बेंच ने कहा कि ये चीफ जस्टिस के ऊपर है कि वो इस केस की सुनवाई में रहे या नहीं.

प्रशांत भूषण ने जस्टिस सीकरी के सवालों के जवाब में कहा कि कन्फ्यूजन की वजह जस्टिस जे चेलमेश्वर की बेंच में सुनवाई से एन पहले बेंच बदला जाना है. गुरुवार को तय सुनवाई से पहले बुधवार को बेंच बदल दी गई थी, लेकिन जस्टिस चेल्लमेश्वर ने मेंशनिंग के साथ ही सुनवाई कर ली. इस मामले की जांच पांच सीनियर मोस्ट जजों की संविधान पीठ के पास सुनवाई के लिए रेफर कर दिया. हालांकि चीफ जस्टिस ने याचिका अपने पास विचार के लिए मंगा ली थी, लेकिन इसके बावजूद जस्टिस चेलमेश्वर ने इस मामले की सुनवाई की और संविधान पीठ तक मामला भेजने की बात कह दी. अब फिर ऐसी ही याचिका जस्टिस सीकरी की कोर्ट में आई तो उन्होने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठा दिया. बस तभी बहस गरम हो गई.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सीकरी की अदालत में जब सवाल जवाब चल रहे थे तभी याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि जब चीफ जस्टिस सवालों के घेरे में हैं तो वो बेंच में कैसे रह सकते हैं. उन्हें नैतिक अधिकार नहीं है इस मामले में सुनवाई का.

कोर्ट से उनकी इन दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने प्रशांत भूषण के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला चलाने की भी बात कही. कोर्ट में गर्मागर्म बहस के दौरान माहौल तनावपूर्ण हुआ तो वकीलों ने प्रशांत भूषण को सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला. बाद में बाहर आने के बाद प्रशांत भूषण ने बार के अधिकारियों पर कोर्ट के आगे सरंडर करने की बात भी कही.

मेडिकल कॉलेजों को राहत के लिए उच्च न्यायिक पदों पर बैठे लोगों के नाम पर घूस लेने के इस मामले में सीबीआई ओडिशा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. कैंपेन फॉर ज्यूडि़शियल अकाउंटेबिलिटी एेंड रिफॉर्म्स संस्था की ओर से इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस की देखरेख में SIT बनाने  की मांग की गई है. हालांकि गुरुवार को ही एक अन्य बेंच ने इसी तरह की याचिका की सुनवाई के लिए पांच वरिष्ठ जजों की संविधान पीठ का गठन किया है. पीठ 13 नवंबर से इसकी सुनवाई करेगी. कोर्ट ने सीबीआई को मामले से जुडी केस डेयरी व दस्तावेज सीलबंद कवर में संविधान पीठ के सामने रखने के आदेश जारी किए हैं. कोर्ट ने केंद्र व सीबीआई को नोटिस भी जारी किए हैं.

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