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गणित के सरल प्रश्नों को हल करने में कच्चे हैं बिहार के बच्चे : रिपोर्ट

गणित के सरल प्रश्नों को हल करने में बिहार के 6-14 आयुवर्ग के स्कूली बच्चों को शिक्षा संबंधी एक रिपोर्ट में कच्चा बताया गया है जिस पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी आज चिंता जताई.

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गणित के सरल प्रश्नों को हल करने में बिहार के 6-14 आयुवर्ग के स्कूली बच्चों को शिक्षा संबंधी एक रिपोर्ट में कच्चा बताया गया है जिस पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी आज चिंता जताई.

ग्रामीण बिहार में वर्ष 2010 की शैक्षणिक स्थिति पर गैर सरकारी संस्था ‘प्रथम’ द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि जोड़, घटाव और भागफल के बुनियादी गणितीय प्रश्नों को हल करने में बिहार के स्कूली बच्चों की स्थिति चिंताजनक है.

बिहार में प्रथम संस्था की रिसोर्स सेंटर की निदेशक रुक्मिणी बनर्जी ने कहा, ‘गणित के सामान्य प्रश्नों को हल करने में पहली से लेकर आठवीं कक्षा के स्कूली बच्चों की स्थिति बहुत चिंताजनक है. सरल पाठ को फर्राटे से पढ़ने में बच्चों की क्षमता का स्तर भी बहुत असंतोषजनक है.’ रुक्मिणी ने कहा कि दैनिक जीवन के हिसाब की गणना करने में स्कूली बच्चों की क्षमता घट रही है.

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संस्था की बिहार संबंधी शैक्षणिक रिपोर्ट को जारी करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पर हैरत जताते हुए कहा, ‘आर्यभट्ट की धरती बिहार में स्कूली बच्चे गणित में पिछड़ रहे हैं. इसका मतलब है शिक्षक ठीक से पढ़ा नहीं रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि राजग सरकार का जोर गुणवत्ता पर विशेष तौर पर होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली कक्षा के 46 फीसदी बच्चे तो कुछ भी नहीं पढ़ सकते और दूसरी कक्षा के 16 फीसदी बच्चों में अक्षर ज्ञान की क्षमता नहीं है.{mospagebreak}

इस रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में पढ़ने वाले 31 फीसदी बच्चों को ट्यूशन की दरकरार पड़ती है, जबकि आठवीं में पढ़ने वाली 63 फीसदी विद्यार्थियों के लिए ट्यूशन अनिवार्य है.

रिपोर्ट में पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों की गणित के प्रश्न हल करने की बुनियादी क्षमता पर चिंता जताई गयी है.

राज्य के पहली कक्षा के 46 और दूसरी कक्षा के 17 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो जोड़, घटाव और भागफल से संबंधित बुनियादी प्रश्न हल नहीं कर सकते. वर्ष 2010 की रिपोर्ट के लिए संस्था ने बिहार में 265 प्राथमिक, 702 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों का अवलोकन किया.

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रिपोर्ट के अनुसार पहली से पांचवी कक्षा के 14 फीसदी स्कूलों में कोई मुख्य अध्यापक नहीं है. गैर सरकारी संस्था ‘प्रथम’ ने ‘असर 2010’ रिपोर्ट बिहार के 37 जिलों में किये गये अपने सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की है.

मानव संसाधन विकास विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि इस रिपोर्ट में साफ है कि बिहार में स्कूलों में दाखिले के मामले में लिंग आधारित भेदभाव की खाई कम हुई है और बड़ी संख्या में बालिकाओं का स्कूलों में दाखिला हो रहा है.

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