देश में नौकरशाहों की विदेश यात्रा पर लगाम कसते हुए केंद्र सरकार ने अब उनकी यात्राओं की अधिकतम संख्या तय कर दी है. अब कोई भी अधिकारी एक कैलेंडर वर्ष में चार बार से अधिक विदेश यात्रा पर नहीं जा सकेगा.
वित्त मंत्रालय की ओर से इस ओर जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि सचिव स्तर के अधिकारी तभी विदेश यात्रा पर जाएंगे, जब विभाग में कोई और उपलब्ध नहीं हो. यही नहीं, सरकार के विभागों के सचिवों की संसद सत्र के दौरान विदेश यात्रा पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. साथ ही यह भी कि विभाग के सचिव और मंत्री एक ही समय पर विदेश नहीं जा सकते.
...तो लेनी होगी प्रधानमंत्री की अनुमति
नए दिशानिर्देश के मुताबिक, अगर किसी परिस्थिति में विभाग के सचिव को तय चार बार से अधिक विदेश यात्रा करनी पड़ रही है तो इसके लिए प्रधानमंत्री से अनुमति लेनी होगी. संशोधित व्यापक दिशानिर्देश में कहा गया है कि ऐसा विदेश यात्राओं को सीमित करने के साथ ही अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया गया है.
सचिवों की स्क्रीनिंग कमिटी करेगी अधिकृत
नौकरशाहों की विदेश यात्रा को सचिवों की एक स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा अधिकृत किया जाएगा. हालांकि, पीएसयू और स्वायत्त संस्थाओं के अधिकारियों की विदेश यात्रा को सचिवों की समिति के दायरे से बाहर रखा गया है. नए नियम के तहत किसी भी सूरत में विदेश यात्रा 5 दिन से अधिक की नहीं होनी चाहिए.
नए नियमों के तहत, जिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भारत सदस्य देश है, उनके द्वारा द्विपक्षीय या बहुपक्षीय समझौते के तहत या नियमित आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत अगर विदेश यात्रा और आतिथ्य का खर्च वहन किया जा रहा है तो इसे स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है.