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सीबीआई में जंग: विवाद सामने आने पर बैकफुट पर आई सरकार!

सीबीआई में चल रही उथल पुथल के बीच आज सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई होगी.

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सीबीआई कार्यालय (File photo:aajtak)
सीबीआई कार्यालय (File photo:aajtak)

सीबीआई में चल रही उथल पुथल के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई है. छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ही यह बयान जारी करना पड़ा कि दोनों बड़े अधिकारियों को केवल छुट्टी पर भेजा गया है.

जांच पूरी होने तक वे छुट्टी पर रहेंगे. सीबीआई प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि आलोक वर्मा अब भी सीबीआई डायरेक्टर और राकेश अस्थाना स्पेशल डायरेक्टर हैं. सीवीसी के आदेश को देखते हुए दोनों के अधिकार वापस लिए गए हैं. एम. नागेश्वर राव को केवल अस्थायी कार्यभार सौंपा गया है.

प्रवक्ता ने जानकारी दी कि सीबीआई की नई टीम अस्थाना पर लगे घूस और जबरन वसूली के मामलों की जांच करेगी. इसमें सतीश डागर एसपी मुरुगुसन, जॉइंट कमिश्नर और डीआईजी तरुन गाबा होंगे. इस टीम को अस्थाना के खिलाफ दर्ज सभी मामलों के कागजात सौंप दिए गए हैं जिससे जांच शुरू हो सके. माना जा रहा है कि आलोक वर्मा के घर के बाहर से पकड़े गए 4 आईबी अफसरों के मामले के बाद आलोचना झेल रही सरकार ने यह बयान जारी कराया है.

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सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि बड़े मामले जैसे विजय माल्या, 2 जी स्कैम, आईआरसीटीसी स्कैम, एयरसेल मैक्सिस और अगुस्टावेस्टलैंड मामलों की जांच पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि अस्थायी डायरेक्टर सभी संवेदनशील मामलों की निगरानी करेंगे. हालांकि आलोक वर्मा के नजदीकी 4 अफसरों को भेज देने से समन्वय में थोड़ी मुश्किल हो सकती है. जॉइंट डायरेक्टकर पॉलिसी एके शर्मा अनिश्चितकालीन छुट्टी पर चले गए हैं, डिप्टी एसपी अजय कुमार बस्सी को पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया है.

अडिशनल गुम को जबलपुर और मनीष सिन्हा को नागपुर भेज दिया गया है. अस्थाना के करीब माने जाने वाले जॉइंट डायरेक्टर (पॉलिसी) साईं मनोहर को एसआईटी हेड बनाया गया है. जॉइंट डायरेक्ट वी मुरगेसन अस्थाना पर लगे घूसखोरी और जबरन वसूली के मामलों की जांच करेंगे.

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