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भोपाल: उपेक्षा का दर्द नहीं छुपा सकीं पी. टी. उषा

पीटी उषा का पूरा नाम याद करते और बड़े होकर उन्हीं की तरह देश का नाम रोशन करने के सपने देखती भारत की एक पीढ़ी आज जवान हो चुकी है. लेकिन, देश का वो सिस्टम अभी भी बच्चा बना हुआ है, जिसके हाथ में खेल और खिलाड़ियों की हिफ़ाज़त का जिम्मा है.

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पीटी उषा का पूरा नाम याद करते और बड़े होकर उन्हीं की तरह देश का नाम रोशन करने के सपने देखती भारत की एक पीढ़ी आज जवान हो चुकी है. लेकिन, देश का वो सिस्टम अभी भी बच्चा बना हुआ है, जिसके हाथ में खेल और खिलाड़ियों की हिफ़ाज़त का जिम्मा है.

भारत में स्‍पोर्ट्स को तरजीह नहीं
शायद यही वजह है कि भोपाल में पीटी ऊषा यह कहते हुए रो पड़ीं कि इंडिया का स्पोर्ट्स ही ऐसा है. एक ओर देश के खेल मंत्री जब भोपाल में उपलब्धियों का बखान कर रहे थे, उसी वक्त बच्चों और युवाओं का आदर्श बन चुकी उड़नपरी अपने अपमान के आंसू बहा रही थी. एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने पहुंची पीटी उषा इस बात से आहत हैं कि भोपाल में किसी ने उनकी फिक्र नहीं की. ऊषा सुबह साढ़े आठ बजे एयरपोर्ट पहुंचीं, लेकिन 10 बजे तक कोई उन्‍हें लेने नहीं आया. फोन किया, तो गाड़ी पहुंची, फिर वे जैसे-तैसे साई-सेंटर पहुंच सकीं. राष्ट्रीय खेल प्राधिकरण के लोग मंत्रीजी की अगुआई में लगे रहे और पद्मश्री पीटी ऊषा उनके लिए गैरज़रूरी जैसी हो गईं.

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