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चुनावी दंगल के लिए ममता बनर्जी ने मांगा अन्‍ना हजारे का समर्थन, सियासत गरम

चुनावी गहमागहमी के बीच एक बार फिर अन्ना हजारे ने अपना पासा फेंक दिया है. इसके बाद अगली चाल चलने में तेजी दिखाई है ममता बनर्जी ने. ममता अन्‍ना का समर्थन हासिल करने की कोशिश में फिलहाल दूसरी पार्टियों से आगे दिख रही हैं.

अन्ना हजारे अन्ना हजारे

चुनावी गहमागहमी के बीच एक बार फिर अन्ना हजारे ने अपना पासा फेंक दिया है. इसके बाद अगली चाल चलने में तेजी दिखाई है ममता बनर्जी ने. ममता अन्‍ना का समर्थन हासिल करने की कोशिश में फिलहाल दूसरी पार्टियों से आगे दिख रही हैं.

कभी अन्ना हजारे राजनीतिक आंदोलन की धुरी थे. जब राजनीतिक दलों के नेता मंच पर आने को बेताब रहते थे, तब खुद अन्ना इससे सख्त परहेज करते थे. राजनीति से ऐसी दूरी ने ही उन्हें अपने सबसे प्रिय शिष्य केजरीवाल से भी दूर कर दिया. लेकिन रालेगण सिद्धि के यादव बाबा मंदिर में बैठे अन्ना हजारे क्या राजनीति से सचमुच दूर हैं?

कुछ दिनों पहले ही अन्ना हजारे ने 17 मुद्दों को लेकर सभी राजनीतिक दलों को चिट्ठी लिखी थी. लेकिन जवाबी खत मिला सिर्फ ममता दीदी की तरफ से. ममता बनर्जी ने चिट्ठी में लिखा कि अगर वे सत्ता में आती हैं, तो उन सारे मुद्दों को अमल में लाएंगी.

अन्ना हजारे भले ही राजनेता न हों, लेकिन नेताओं पर ऐसे कैसे भरोसा कर लें. उन्‍होंने लिख दिया कि अगर ममता बनर्जी शपथ-पत्र देती हैं, तो वे समर्थन करने के लिए तैयार हैं.

शपथ-पत्र को लेकर लेकर तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि अभी इस बारे में कोई जवाब देना जल्दी होगी. लेकिन एक बात तो तय है कि अन्ना की इस पहल से तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट सियासत की सुर्खियों में आ गई है.

अन्ना की चिट्ठी और ममता के जवाब के एक बात तो तय है कि ममता पीएम की रेस में आगे निकलने की होड़ में हैं. साथ ही अन्ना ने भी जता दिया है कि वे 'दिल्ली' से दूर नहीं हुए हैं.

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