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मणिपाल गैंगरेप मामले में 3 गिरफ्तार, आरोपियों ने की खुदकुशी की कोशिश

मणिपाल के पास एक सप्ताह पहले केरल की 22 वर्षीय मेडिकल छात्रा के अपहरण और उसके साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में पुलिस ने 3 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया. इनमें से दो ने कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश की.

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वारदात
वारदात

मणिपाल के पास एक सप्ताह पहले केरल की 22 वर्षीय मेडिकल छात्रा के अपहरण और उसके साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में पुलिस ने 3 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया. इनमें से दो ने कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश की.

आईजीपी (पश्चिमी रेंज) प्रताप रेड्डी ने संवाददाताओं को बताया कि पुलिस को यह सफलता तब मिली, जब एक आरोपी योगेश शान्तपा पूजरे (30 वर्ष) ने सुबह उडुपी के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में फोन कर अपना अपराध स्वीकार किया.

उन्होंने कहा ‘पहले उसने जहर खाया और फिर हमें फोन किया. वह फोन पर कराह रहा था और उसे यह कहते सुना गया कि पुलिस उसे पकड़ लेगी, लेकिन वह ऐसा नहीं होने देगा.’ रेड्डी के अनुसार, पुलिस ने मोबाइल फोन ट्रैकर की मदद से योगेश के घर का पता लगाया और उसे अस्पताल ले गई. उसकी हालत अब स्थिर है.

आईजीपी के मुताबिक, पूछताछ में योगेश ने अपने साथी का नाम हरिप्रसाद पूजरे (26 वर्ष) बताया. जब ऑटो चालकों से पूछताछ की गई थी, तब हरिप्रसाद से भी जवाब तलब किया गया था. योगेश और हरिप्रसाद दोनों ही ऑटो चालक हैं और उनका आपराधिक रिकॉर्ड है.

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दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद तीसरे आरोपी आनंद (28 वर्ष) को पास के सन्नाकीबेट्टू गांव से पकड़ा गया. वह कथित तौर पर फांसी लगाने की कोशिश कर रहा था.

रेड्डी ने बताया कि पुलिस आनंद को सुबह से ही ओंथीबेट्टू गांव में खोज रही थी. सही समय पर उसका पता चला और उसे आत्महत्या करने से रोका गया. उसे केएमसी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है. आरोपियों की गिरफ्तारी की घोषणा से पहले बैंगलोर में मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कहा कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में होगी.

रेड्डी ने बताया कि अपराध में इस्तेमाल आटोरिक्शा का भी पता लगा लिया गया है. उन्होंने बताया पीड़ित का अपहरण और सामूहिक बलात्कार पहले से तय नहीं था. आरोपी नशे में थे जब उन्होंने लड़की का अपहरण कर बलात्कार किया.

20 जून को केरल की मेडिकल की छात्रा मणिपाल विश्वविद्यालय परिसर में स्थित लाइब्रेरी से अपने कमरे में जा रही थी. उसी दौरान उसका अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किया गया. इस घटना के विरोध में जगह-जगह प्रदर्शन किए गए थे. इस मामले में पुलिस की 20 टीमें और 200 पुलिसकर्मी आरोपियों का पता लगाने में जुटे थे.

रेड्डी ने बताया कि पुलिस को पीड़ित से सहयोग की उम्मीद है, क्योंकि उसके लिए बयान देना मुश्किल हो रहा है, जबकि जांच के लिए यह जरूरी है. उनके मुताबिक, पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए कई कानूनी प्रक्रियाएं हैं. जरूरत इस बात की है कि पीड़ित अपराध वाली जगह की शिनाख्त और पुष्टि करे.

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