विजय बहुगुणा के नेतृत्व वाली उत्तराखण्ड की कांग्रेस सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित किया. इस दौरान विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सदन का बहिष्कार किया.
सत्र शुरू होते ही मुख्यमंत्री बहुगुणा ने विश्वास मत का प्रस्ताव रखा. यह बताते हुए कि 70 सदस्यीय सदन में सरकार को बहुमत है और विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने के लिए सदस्यों की पर्याप्त संख्या है, बहुगुणा ने कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्यों को अभी भी साकांक्ष रहना होगा, ताकि एक भी मत बेकार न जाए.
सदन में हंगामा शुरू हो गया, क्योंकि भाजपा ने सबसे पहले बहस कराने की मांग की. अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाने के बाद भाजपा के सदस्यों ने सदन का बहिष्कार किया.
पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने सदन के बरामदे पर धरना दिया और सरकार विरोधी नारे लगाए. निशंक ने कहा कि सरकार का गठन असंवैधानिक तरीके से हुआ है. उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, 'सरकार दादागीरी दिखाने में लगी हुई, जो उचित नहीं है. यह गैरकानूनी सरकार है.'
निशंक ने आगे कहा कि सरकार ने विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने के लिए आमसहमति बनाने का प्रयास नहीं किया, इसलिए भाजपा अपना उम्मीदवार पेश करने के लिए बाध्य है.
मुख्यमंत्री बहुगुणा अपनी बात पर कायम रहे कि शेष प्रक्रिया मत विभाजन के दौरान पूरी हो जाएगी. उनकी सरकार के पक्ष में 39 मत हैं.
ज्ञात हो कि पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड में कांग्रेस सरकार को काम चलाऊ बहुमत है. पार्टी नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के लिए बहुगुणा का नाम तय किया था, जिसका कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री हरीश रावत एवं उनके समर्थकों ने विरोध किया था.
शुरुआत में हरीश समर्थकों ने हरक सिंह रावत के नेतृत्व में विधायक पद की शपथ लेने से इनकार कर दिया था. मात्र कुछ ही दिनों पहले उन्हें मना लिया गया. 70 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 32 सदस्य हैं. यह संख्या भाजपा के सदस्यों की संख्या से एक अधिक है.
कांग्रेस ने उत्तराखण्ड क्रांति दल (उक्रांद) के एक और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के तीन विधायकों से सहयोग लेकर सरकार का गठन किया है.