शीर्ष रिपब्लिकन नेता जॉन मैक्केन ने कहा कि अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की भारत की दावेदारी का पूरी तरह समर्थन करना चाहिए. रिपब्लिकन नेता का यह बयान इस मुद्दे पर राष्ट्रपति बराक ओबामा का बयान आने के कुछ ही दिनों बाद आया है जिसमें उन्होंने इसे ‘बेहद कठिन और जटिल’ बताया था.
कार्नेजी इंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में सीनेटर मैक्केन ने कहा, ‘अगर हम चाहते हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी साझा करने में हमारे साथ हो तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के उच्च मंच पर जगह दिए जाने की आवश्यकता है.’ वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक में कल मैक्केन ने कहा, ‘अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का पूरी तरह समर्थन करना चाहिए.’ भारत यात्रा पर रवाना होने के पहले ओबामा ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का मुद्दा ‘बेहद कठिन और जटिल’ है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को ठोस समर्थन देने का वादा किए बिना ओबामा ने कहा, ‘मैं भी अपनी यात्रा के दौरान वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका पर चर्चा करने की उम्मीद करता हूं.’ मैक्केन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किए जाने का काफी महत्व है क्योंकि दो नवंबर के आम चुनाव के बाद रिपब्लिकन पार्टी ताकतवर शक्ति के तौर पर उभरी है. दो नवंबर के चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी को बढ़त हासिल हो गई है.{mospagebreak}
मैक्केन ने कहा, ‘वैश्विक व्यवस्था के आधारभूत संस्थानों में भारत को निश्चित तौर पर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय उर्जा एजेंसी, एशिया प्रशांत सहयोग मंच और वैश्विक अप्रसार व्यवस्था के उन हिस्सों में भारत को शामिल करने का प्रयास करना चाहिए जिनसे भारत को अब तक बाहर रखा गया है.’ साल 2008 के राष्ट्रपति चुनाव में ओबामा के खिलाफ लड़ चुके मैक्केन ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक शासन के वैश्विक प्रसार का नेतृत्व करने के लिए स्वाभाविक तौर पर तैयार है. लोकतांत्रिक शासन तेजी से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मानक बनता जा रहा है जिसे हमारे देशों को बढ़ावा देना चाहिए.
मैक्केन ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि अमेरिका दुनियाभर में लोकतंत्र को प्रोत्साहन देने के लिए अपने राष्ट्रीय संस्थानों को विकसित करने की खातिर भारत के साथ काम कर सकता है.’ उन्होंने कहा, ‘भारत अमेरिका संबंधों की सर्वाधिक सकारात्मक विशेषता हमारा साझा लोकतांत्रिक मूल्य है और आखिरकार एक साथ इन मूल्यों को आगे बढ़ाने में हमारी सफलता हम दोनों की सुरक्षा का शास्वत स्रोत प्रदान करेगी.’ मैक्केन ने भारत अमेरिका भागीदारी की उम्मीदों को बेहद उंचा बताया.
मैक्केन ने कहा, ‘अगर भारत और अमेरिका एक सामरिक भागीदारी का निर्माण करते हैं तो हम दोनों इसे चाहते हैं और इसको लेकर प्रतिबद्ध हैं और समान मात्रा में इसका बचाव करते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘यद्यपि हमारे लोकतांत्रिक मूल्य हमारी ताकत का सबसे बड़ा स्रोत हैं लेकिन हमारी घरेलू राजनीति का दबाव हमारी उभरती भागीदारी के लिए संभवत: सबसे बड़ा खतरा है.’