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रिकार्ड के बारे में नहीं सोच रहा: तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर के करोड़ों प्रशंसक दिल थामकर उनके 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक का इंतजार कर रहे हैं लेकिन इस दिग्गज बल्लेबाज पर इंग्लैंड के खिलाफ आगामी श्रृंखला में इसका कोई दबाव नहीं है.

सचिन तेंदुलकर सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर के करोड़ों प्रशंसक दिल थामकर उनके 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक का इंतजार कर रहे हैं लेकिन इस दिग्गज बल्लेबाज पर इंग्लैंड के खिलाफ आगामी श्रृंखला में इसका कोई दबाव नहीं है.

तेंदुलकर ने कहा, ‘मैं रिकार्ड के बारे में नहीं सोच रहा हूं. मैं सिर्फ दौरे का लुत्फ उठाने के बारे में सोच रहा हूं. किसी भी प्रदर्शन की सफलता का मंत्र रिकार्ड की पीछा नहीं करना है. मैं सोचता हूं कि ‘खेल का लुत्फ उठाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है और कैसे मैं इस मजे को बढ़ा सकता हूं’. खेल का लुत्फ उठाने ने पिछले दो दशक में तेंदुलकर की सफलता में अहम भूमिका निभाई है.

‘द डेली टेलीग्राफ’ ने इस दिग्गज बल्लेबाज के हवाले से कहा, ‘अगर मुझे अधिक लुत्फ आता है तो स्वाभाविक तौर पर खेल का स्तर ऊंचा हो जाएगा. मेरे लिए यह अधिक अहम है. मैं अच्छा खेल रहा हूं और चीजें होती हैं. मुझे मैदान पर उतरकर रिकार्ड का पीछा करने की जरूरत नहीं है. यह एक प्रकिया है. अपको मजबूत बुनियाद बनानी होती है और फिर इसे आगे बढ़ाना होता है.’

तेंदुलकर ने संन्यास के विचार को भी खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, ‘मैंने इस बारे में नहीं सोचा है. मैं प्रत्येक लम्हें का लुत्फ उठा रहा हूं. मुझे मजा आ रहा है. मै इस बारे में ध्यान दे रहा हूं कि कैसे अपने खेल का और लुत्फ उठा सकता हूं और कैसे अपने खेल के स्तर में सुधार कर सकता हूं. यह बेहतर होने का खेल है. किसी को नहीं पता कि कल क्या होने वाला है. कम से कम आज मुझे पता है कि मैं क्रिकेट का लुत्फ उठाना चाहता हूं, प्रत्येक लम्हें का मजा लेना चाहता हूं.’

तेंदुलकर चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला की तैयारी के अलावा यहां अपने परिवार के साथ समय भी बिता रहे हैं. उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला से हटकर इंग्लैंड के लिए जल्दी रवाना होने को प्राथमिकता दी. उन्होंने कहा, ‘जब मैं इंग्लैंड में समय बिताता हूं तो यह काफी अलग होता है. मैं कई ऐसी चीजें कर सकता हूं जो मैं भारत में नहीं कर सकता. मैं अपने बच्चों के साथ पार्क में जा सकता हूं, जो चाहूं वो कर सकता हूं, फिर चाहे यह फुटबाल या क्रिकेट का खेल ही क्यों नहीं हो. मैं दोनों का लुत्फ उठाता हूं. विचार यह है कि भारत में जीवन और भारत के बाहर जीवन में संतुलन बनाया जाये. जीवन में खुशी के लिए दोनों से सर्वश्रेष्ठ हासिल किया जाये.’

पाकिस्तान के खिलाफ मोहाली में विश्व कप सेमीफाइनल के दौरान जीवनदान से भरी अपनी 85 रन की पारी को याद करते हुए तेंदुलकर ने कहा कि उन्हें केवल एक आसान मौका दिया था जब वह गेंद को मिडविकेट के उपर से भेजना चाहते थे लेकिन सही टाइमिंग नहीं कर पाये.

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