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कोल ब्लॉकों का आवंटन निरस्त नहीं होगा: पवन कुमार बंसल

मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की कोल ब्लॉकों के आवंटन को निरस्त करने की मांग को नकारते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि अगर किसी ने कुछ गलत किया है तो कानून अपना काम करेगा.

पवन कुमार बंसल पवन कुमार बंसल

मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की कोल ब्लॉकों के आवंटन को निरस्त करने की मांग को नकारते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि अगर किसी ने कुछ गलत किया है तो कानून अपना काम करेगा.

केंद्रीय संसदीय कार्य और जल संसाधन मंत्री पवन बंसल ने कहा कि कोल ब्लॉकों का आवंटन निरस्त नहीं होगा. हालांकि, उन्होंने कहा कि एक अंतर मंत्रालयी समूह (आईएमजी) इस बात को देख रहा है कि कहीं किसी लाभार्थी ने गलत तथ्यों को पेश करके तो कोल ब्लॉक का आवंटन नहीं लिया या आवंटन के बाद उस ब्लॉक पर न तो कोई काम किया और न ही निवेश किया.

बंसल ने कहा, ‘अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है तो कानून अपना काम करेगा. दोषी पाया जाने वाला व्यक्ति चाहे जितना भी बड़ा या प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.’

इस संबंध में बंसल ने दावा किया कि कोल ब्लॉकों के आवंटन में अपनायी गयी प्रक्रिया में कुछ भी गलत नहीं हुआ है और आवंटन के बाद राज्य सरकारों सहित कहीं से भी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई.

एक सवाल के जबाव में बंसल ने माना कि कुछ मामलों में स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्टिड आवंटी कंपनियों ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर संयुक्त उपक्रम बना लिये हैं और आईएमजी इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि ऐसा लीज एग्रीमेंट (पट्टा समझौते) की शर्तों के तहत हुआ है या उनका उल्लंघन हुआ है. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह तथ्यहीन आंकड़ें पेश कर देश की जनता को गुमराह कर रही है और ऐसे आरोप देश को विकास के पथ से पीछे खींच रहे हैं.

बंसल ने कहा कि जब हम विदेशों से निवेश लाने की बात कर रहे हैं तब कोल ब्लॉकों के आवंटन को निरस्त करने से एक गलत संदेश जायेगा. कैग की रिपोर्ट के आधार पर लगाये जा रहे 1.86 लाख करोड़ रूपये के नुकसान के आकंडे को ‘अस्तित्वहीन और काल्पनिक’ बताते हुए बंसल ने कहा कि कोल ब्लाकों को आवंटित करने का अधिकार राज्यों के मुख्य सचिवों की सदस्यता वाली जांच समिति के पास है और उनके पट्टा समझौते भी राज्य सरकारों के साथ होता है. इसके अलावा उसकी 14 प्रतिशत रॉयल्टी भी राज्यों को ही जाती है.

बंसल ने कहा कि कैग ने अगले 35 सालों में होने वाले नुकसान का तो आंकलन किया, लेकिन यह अंदाजा नहीं लगाया कि कोयला खानों के विकास पर अगले पांच वर्षों में कितने रुपये का खर्चा आता.

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