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कोयला आवंटन पर SC ने केंद्र से जवाब मांगा

कोयला ब्लाक आवंटन में कथित अनियमितता का मामला न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है, जब उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या निजी कंपनियों को प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन करते समय दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया गया.

कोल आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार कोल आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार

कोयला ब्लाक आवंटन में कथित अनियमितता का मामला न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या निजी कंपनियों को प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन करते समय दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया गया.

शीर्ष अदालत ने केंद्र की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि चूंकि इस मामले को संसदीय समिति देख रही है, इसलिये अदालत को इस मुद्दे पर विचार नहीं करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा, ‘ये अगल अलग कार्य हैं.’ शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति आर एम लोढा और न्यायमूर्ति ए आर दवे की पीठ ने कहा कि याचिका में गंभीर प्रश्न उठाये गए हैं और ‘इस पर सरकार को स्पष्टीकरण देने की जरूरत है.’

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘लोक लेखा समिति (पीएसी) का कार्य अलग है. संसद और पीएसी, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के आधार पर काम करते हैं. हम उनके कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते, लेकिन याचिका में अलग विषयों को उठाया गया है. इसमें ठोस बातें उठायी गई है जिसके बारे में आपको स्पष्टीकरण देने की जरूरत है.’ पीठ ने स्पष्ट किया कि वह केंद्र की ओर से कोयला ब्लाक आवंटन के लिए तैयार किये गए दिशानिर्देशों से जुड़े आयामों तक ही अपने को सीमित रख रही है.

अदालत ने यह आदेश कोयला ब्लाक आवंटन में कथित अनियमितता के बारे में वकील एम एल शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.

पीठ ने सोलिसिटर जनरल रोहिंटन नरिमा की उस दलील को खारिज कर दिया कि कैग की रिपोर्ट पर आधारित यह याचिका ‘अपरिपक्व’ स्तर की है और इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. कैग जैसे संवैधानिक निकाय की रिपोर्ट पर भरोसा किये जाने की बात कहते हुए उच्चतम न्यायालय ने कोयला मंत्रालय के सचिव को आठ सप्ताह के भीतर कोयला ब्लाक आवंटन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा.

पीठ ने कहा कि हलफनामे के दायरे में कोयला ब्लाक आवंटन के लिए सरकार की ओर से तैयार किये गए दिशानिर्देश आ जाने चाहिए.

अदालत ने कहा कि सचिव को इन कोयला ब्लाकों के आवंटन के लिए अपनायी गई प्रक्रिया का ब्यौरा देने के साथ यह भी बताना चाहिए कि क्या इन दिशानिर्देशों में ऐसी व्यवस्था निहित थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवंटित कोयला ब्लाक गलत ढंग से कुछ निजी कंपनियों के पास नहीं चली जाए.

पीठ ने यह भी जानना चाहा कि क्या कोयला ब्लाक के आवंटन में दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया गया और क्या आवंटन के दौरान नीतियों के मकसद को पूरा किया गया.

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