कलकत्ता उच्च न्यायालय ने किसी सरकारी एजेंसी द्वारा बनाये गये फ्लैट का आवंटन धार्मिक आधार पर करने को असंवैधानिक करार दिया. मुख्य न्यायाधीश जे एन पटेल और न्यायमूर्ति बी भट्टाचार्य ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि संविधान में धार्मिक आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है.
कोलकाता मेट्रोपोलिटन डवैलपमेंट आथरिटी (केएमडीए) ने 10 मार्च को शहर के वैष्णवघाट इलाके में करीब 300 फ्लेटों की बिक्री के लिये विज्ञापन प्रकाशित किया याचिकाकर्ता के वकील कौशिक चंद ने बताया कि विज्ञापन में कहा गया है कि मुस्लिम इसाई सिख और पारसी जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिये इनमें से 26 प्रतिशत फ्लैट आरक्षित हैं.
उन्होंने कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और ऐसा करने से सरकार की धर्मनिरपेक्ष छवि प्रभावित होगी. केएमडीए की तरफ से पेश होते हुए सौमित्र बसु ने कहा कि वह अदालत के फैसले का पालन करेंगे. अदालत ने केएमडीए से कहा कि वह दोबारा विज्ञापन निकाले.