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2जी में पूर्व नौकरशाह की गवाही की रिपोर्ट गलत: संसद

लोकसभा सचिवालय ने शुक्रवार को कहा कि मीडिया की जिन रिपोर्टों में बताया गया है कि पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम प्रवेश शुल्क को बढ़ाकर 36 हजार करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को प्रधानमंत्री ने नजरंदाज किया, वह तथ्यात्मक रूप से गलत है और विशेषाधिकार का हनन है.

लोकसभा सचिवालय ने शुक्रवार को कहा कि मीडिया की जिन रिपोर्टों में बताया गया है कि पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम प्रवेश शुल्क को बढ़ाकर 36 हजार करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को प्रधानमंत्री ने नजरंदाज किया, वह तथ्यात्मक रूप से गलत है और विशेषाधिकार का हनन है.

'समिति के सामने नहीं दिया वैसा बयान'
सचिवालय ने यह भी कहा कि नौकरशाह की टिप्पणी पर गलत रिपोर्ट मामले की सुनवाई कर रही संसदीय समिति की भी अवमानना है. मामले की सुनवाई कर रही संयुक्त संसदीय समिति लोकसभा सचिवालय के अंतर्गत काम करती है. सचिवालय ने एक बयान में कहा कि रिपोर्ट में उद्धरण में दिए गए बयान को पूर्व कैबिनेट सचिव के.एम. चंद्रशेखर द्वारा गुरुवार को समिति के समक्ष कहते दिखाया गया. बयान में कहा गया, 'यह स्पष्ट किया जाता है कि जो दिखाया गया वह तथ्यात्मक रूप से गलत है और तोड़मरोड़ कर पेश किया गया है. चंद्रशेखर ने गवाही के दौरान समिति के सामने ऐसा कोई बयान नहीं दिया.'

लाइसेंस शुल्‍क में वृद्धि की 'संभावना' का जिक्र
लोकसभा सचिवालय ने यह भी कहा कि गवाही के इस हिस्से के बारे में संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पी.सी. चाको ने संवाददाताओं से कहा था कि 'उन्होंने (चंद्रशेखर) ने समिति को यह भी बताया कि उसके द्वारा चार दिसम्बर 2007 को पीएम (प्रधानमंत्री) को एक नोट लिखा गया था, जिसमें उन्होंने टेलीफोन घनत्व में वृद्धि, उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि और महंगाई जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस शुल्क में वृद्धि की सम्भावना का उल्लेख किया था.'

चाको ने यह भी कहा कि चंद्रशेखर ने समिति को आगे बताया कि, 'तब पीएम इस मुद्दे पर विभिन्न अन्य मंत्रालयों/विभागों की राय लेना चाह रहे थे' और नौकरशाह का नोट प्रधानमंत्री के निर्देश से सम्बंधित था, जो मीडिया की खबरों और प्रधानमंत्री कार्यालय में पहुंचे विभिन्न पत्रों से सम्बंधित था.

चाको ने कहा था, 'लेकिन उन्होंने (नौकरशाह ने) कहा कि मुद्दे पर निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कई अन्य पहलुओं पर भी गौर किया जाना था, जिसमें भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की रिपोर्ट भी शामिल थी.'

इस संदर्भ में लोकसभा सचिवालय ने कहा, 'संसदीय समिति में गवाही का अपुष्ट प्रकाशन और गलत या तोड़-मरोड़ कर पेश की गई रिपोर्ट का प्रकाशन विशेषाधिकार का हनन और समिति की अवमानना है और इसलिए सदन की भी अवमानना है.'

दस्‍तावेज के प्रकाशन पर रोक
सचिवालय के बयान में कहा गया कि नियम और चलन के मुताबिक संसदीय समिति की प्रक्रिया, या उसके समक्ष दी गई गवाही या उसके समक्ष प्रस्तुत किसी भी दस्तावेज का कोई भी हिस्सा तब तक प्रकाशित नहीं किया जा सकता है जब तक कि उन प्रक्रिया, गवाहियों या दस्तावेजों को सदन में प्रस्तुत नहीं किया जाए. समिति ने लोकसभा के विशेषाधिकार के बारे में यह स्थिति सुंदरैय्या मामले में स्पष्ट कर दिया था.

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