केंद्रीय योजनाओं में राज्य सरकारों को प्राथमिकता के आधार पर खर्च करने की छूट देने का समर्थन करते हुए केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने मंगलवार को कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इसे लागू किया जाएगा.
रमेश ने कहा कि केंद्रीय योजनाएं अलग-अलग राज्यों की जरूरत के हिसाब से बननी चाहिए. केरल और बिहार के लिए केंद्रीय बनाते समय एक जैसा मापदंड नहीं होना चाहिए. राज्य जिस योजना पर प्राथमिकता के आधार पर खर्च करना चाहते हैं उन्हें छूट मिलेगी. 12वीं पंचवर्षीय योजना में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा.
रमेश ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय हर वर्ष 88000 करोड़ रुपये खर्च करता है. अब तक ग्रामीण विकास की योजनाओं में लचीलापन नहीं होता था. 12वीं पंचवर्षीय योजना में ऐसी व्यवस्था की जाएगी ताकि केंद्र से मिलने वाला आधा पैसा राज्य अपनी प्राथमिकता के आधार पर खर्च कर सकें और आधा पैसा केंद्र की प्राथमिकता पर हो. राज्य की प्राथमिकता नयी दिल्ली से तय नहीं होनी चाहिए. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी इससे अवगत कराया गया है.
रमेश ने कहा कि राज्य सरकारें जब वित्तीय मदद के बारे में केंद्र से विकेंद्रीकरण की बात करते हैं तो उन्हें भी अपने सूबों में विकेंद्रीकरण का पूरा पूरा ध्यान देना चाहिए. पंचायती राज संस्थाएं अधिक से अधिक भूमिका निभा सके इसके लिए राज्य इन संस्थाओं को अधिकार दें. उन्होंने कहा कि राज्यों को पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करना चाहिए और अधिकार देना चाहिए.