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मंहगाई कम करने के लिये कोई जादू की छड़ी नहीं: रिजर्व बैंक

मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिये पिछले डेढ़ साल में 10 बार नीतिगत दरों में वृद्धि करने के बाद रिजर्व बैंक ने कहा कि महंगाई थामने के लिये उसके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है.

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मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिये पिछले डेढ़ साल में 10 बार नीतिगत दरों में वृद्धि करने के बाद रिजर्व बैंक ने कहा कि महंगाई थामने के लिये उसके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है.

उद्योग मंडल एसोचैम के एक कार्यक्रम में रिजर्व बैंक डिप्टी गवर्नर के सी चक्रवर्ती ने कहा, ‘आप सभी चाहते हैं कि मुद्रास्फीति नीचे आनी चाहिए. न तो वित्त मंत्रालय और न ही रिजर्व बैंक के पास ऐसी कोई जादू की छड़ी है जिससे महंगाई को नीचे लाया जा सके.’ मई महीने में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 9 प्रतिशत से अधिक रही.

रिजर्व बैंक की कड़ी मौद्रिक नीति तथा सरकार के कदमों के बावजूद मुद्रास्फीति लगातार ऊंची बनी हुई है. केंद्रीय बैंक ने मार्च 2012 तक मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. डिप्टी गवर्नर ने कहा कि मौजूदा मुद्रास्फीति की प्रमुख वजह वस्तुओं की कम आपूर्ति है और केवल कृषि उत्पादकता बढ़ाकर तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिये ही महंगाई की ऊंची दर पर अंकुश लगाया जा सकता है.

उन्होंने कहा, ‘यह कहने की बजाए कि रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति नीचे लाने के लिये कदम उठाने चाहिए, हमें उत्पादकता बढ़ानी होगी तथा सेवा लागत को कम करना होगा, इसी से महंगाई दर नीचे आएगी, अन्यथा यह नीचे नहीं आयेगी.’

इससे पहले, इसी कार्यक्रम में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि अल्पकाल में मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिये कुल मांग को कम करना अहम है. यह हमारे लिये बड़ी चुनौती है. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिये किये जा रहे मौद्रिक उपायों से आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है.

रिजर्व बैंक मार्च 2010 से लेकर अबतक 10 बार प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि कर चुका है. शीर्ष बैंक ने 16 जून को एक बार फिर रेपो और रिवर्स रेपो दोनों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की.

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