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मनमोहन की ओबामा से परमाणु करार पर चर्चा

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने असैन्य परमाणु करार के क्रियान्वयन के उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया. मनमोहन सिंह ने इसके साथ ही ऐलान किया कि भारत और अमेरिका के संबंधों में ‘कोई अवरोध’ नहीं है.

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मनमोहन-ओबामा मुलाकात
मनमोहन-ओबामा मुलाकात

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने असैन्य परमाणु करार के क्रियान्वयन के उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया. मनमोहन सिंह ने इसके साथ ही ऐलान किया कि भारत और अमेरिका के संबंधों में ‘कोई अवरोध’ नहीं है.

ओबामा की पिछले साल नवंबर में भारत यात्रा के बाद प्रधानमंत्री सिंह से उनकी यह पहली मुलाकात है. सिंह ने ओबामा से नवंबर में उनकी ऐतिहासिक भारत यात्रा के दौरान तय किये गये रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के बारे में भी बातचीत की. सिंह ने कहा, ‘मैं आपको यह बताकर बेहद खुश हूं कि आज द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर मिलकर काम करने में कोई तकलीफ पैदा करने वाली वस्तु नहीं बची है.’

आसियान और पूर्वी एशिया सम्मेलन के बाद सिंह ने कहा कि उन्होंने ओबामा को असैन्य परमाणु करार से जुडे जवाबदेही मुद्दे पर देश के कानून के बारे में बताया. सिंह ने कहा कि उन्होंने ओबामा को बताया कि हमारे पास कानून है. नियम बनाये गये हैं. ये नियम हमारी संसद के समक्ष चर्चा के लिए आएंगे. उन्होंने कहा, ‘इसलिए हमने अमेरिकी कंपनियों की चिंताओं पर कुछ हद तक कार्रवाई की है और हम अपने देश के कानून के दायरे में किसी भी विशेष शिकायत पर ध्यान देने के लिए तैयार हैं.’

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प्रधानमंत्री सिंह ने यह भी कहा कि भारत पूरक परमाणु क्षतिपूर्ति समझौते को मंजूरी देने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, ‘मैंने उन्हें (ओबामा को) यह भी बताया कि हम पूरक समझौते पर मुहर लगाएंगे.’ पिछले साल ओबामा की ऐतिहासिक भारत यात्रा को याद करते हुए सिंह ने कहा, ‘पिछले एक साल में हमने हर दिशा में. निवेश, व्यापार, उच्च शिक्षा, स्वच्छ उर्जा और रक्षा में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने में प्रगति की है.’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमने ऐतिहासिक यात्रा के दौरान तय मार्ग को कई तरीकों से मजबूती प्रदान की है, चाहे वह असैन्य परमाणु करार हो, मानवता राहत हो, आपदा प्रबंधन हो या समुद्री सुरक्षा हो, सभी ऐसे मुद्दे जो युद्ध से मुक्त दुनिया की हमारी तलाश में हमें संगठित करते हैं.’ ओबामा ने अपने शुरूआती वक्तव्य में भारत की अपनी यात्रा का जिक्र किया जिसमें दोनों पक्षों ने मित्रता, व्यावसायिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूती प्रदान की.

ओबामा ने कहा, ‘हम कई मुद्दों पर प्रगति कर रहे हैं. हमारे दोनों देशों के बीच संबंध केवल नेतृत्व के स्तर पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी हैं.’ ओबामा ने समुद्री सुरक्षा, परमाणु अप्रसार और आतंकवाद जैसे कुछ मुद्दों को रेखांकित करते हुए कहा, ‘हमारे पास यह पता लगाने के लिए एक उत्कृष्ट अवसर है कि हम न केवल द्विपक्षीय मोर्चे पर बल्कि बहुपक्षीय स्तर पर भी कैसे मिलकर काम कर सकते हैं.’

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दोनों नेताओं ने साल भर में एक बार फिर एक-दूसरे से मुलाकात पर काफी प्रसन्नता प्रकट की. मुलाकात से पहले भारत ने इस बात पर जोर दिया था कि परमाणु जवाबदेही और क्षतिपूर्ति के संबंध में उसके घरेलू कानून प्रभावी रहेंगे और फुकुशिमा की घटना के बाद अन्यथा कोई दावा वास्तविक नहीं रहेगा.

सूत्रों ने कहा कि नियमों में किसी विदेशी कंपनी की संभावित चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि ये स्पष्ट करते हैं कि जवाबदेही असीमित या कभी समाप्त नहीं होने वाली नहीं हो सकती.

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