सुबह सवेरे चाय के साथ बिस्कुट नमकीन का मजा लेने वाले बहुत से लोग यह जानते भी नहीं कि उनका यह नाश्ता सीधे तिहाड़ जेल से आता है. चौंकिए मत, दरअसल तिहाड़ जेल में खाने पीने की बहुत सी वस्तुएं बनाई जाती हैं और जेल प्रशासन अब इन्हें दिल्ली के आसपास के राज्यों में भी भेजने की योजना बना रहा है.
तिहाड़ जेल में बढ़िया क्वालिटी के बिस्कुट, नमकीन, केक और ब्रेड बनाए जाते हैं. जिनकी बाजार में अच्छी मांग है. दिल्ली के बाजारों में यह सामान खूब बिकता है और पसंद भी किया जाता है. इससे उत्साहित जेल प्रशासन अब इन्हें दूसरे राज्यों में भी भेजना चाहता है.
‘टी जे’ नाम से बाजार में बिकने वाले नमकीन और बिस्कुट तिहाड़ जेल में तैयार किए जाते हैं. इनकी बढ़िया गुणवत्ता और कम दाम की वजह से लोगों ने इनमें खासी दिलचस्पी दिखाई है. चूंकि कैदियों से यह सामान पूरी निगरानी और साफ सफाई में बनवाया जाता है, इसलिए इसकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
उम्र कैद की सजा काट रहे एक कैदी राजपाल ने बताया कि तिहाड़ जेल में बनने वाला सामान कैदियों द्वारा बड़ी मेहनत और सफाई से बनाया जाता है. इस सामान को बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला सामान भी अच्छी क्वालिटी का होता है और बाजार में बिकने वाली दूसरी बड़ी कंपनियों के सामान से किसी लिहाज से कमतर नहीं होता.
एक अन्य कैदी मनीष ने बताया कि कैदियों को जेल में होने वाले कार्यों में से कोई भी एक काम चुनने की छूट दी जाती है. इसके बदले में कैदियों को मेहनताना भी दिया जाता है. इससे सजा का समय भी आसानी से कट जाता है और कमाई भी होती है. इसके अलावा यहां के बने उत्पाद में अपनी सहभागिता देख कर खुशी मिलती है.
तिहाड़ जेल के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी सुनील गुप्ता ने बताया कि कैदियों को जेल में रखने का मकसद उन्हें समाज से काटना नहीं होता बल्कि कोशिश होती है कि कैदी अपनी गलती से सबक लें और उन्हें नये सिरे से समाज से जुड़ने की प्रेरणा दी जाती है.
जेल में कैदियों का समय ठीक से गुजरे और वह गलत रास्ते पर न जाएं इसके लिए उन्हें रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखने का प्रयास किया जाता है. उन्होंने बताया कि कैदियों द्वारा बनाए जाने वाले उत्पाद काफी पसंद किए जा रहे हैं. अब यहां बनने वाले उत्पादों की सूची में कुछ और नाम भी जोड़ दिए जाएंगे. आने वाले समय में यहां शहद, शर्बत, होली के रंग भी बनाए जाएंगे, जिन्हें दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में भी भेजा जाएगा.
तिहाड़ जेल के अधीक्षक एस एम भारद्वाज ने बताया कि जेल के कैदी आपस में मेल मिलाप से रहें और सजा के दौरान कुछ ऐसा हुनर सीखें जो जेल से छूटने के बाद उनके लिए आजीविका जुटाने में मददगार हो, इसलिए उन्हें तरह तरह के कामों में लगाया जाता है.
उन्होंने कहा कि जेल में समय काटना बहुत मुश्किल होता है. घर, परिवार, समाज से दूर व्यक्ति को यदि किसी रचनात्मक काम में लगा दिया जाए तो उसका अकेलापन कम होने के साथ उसका समय भी आसानी से कटता है. कैदी दिनभर काम करके थक जाते हैं तो रात में आराम की नींद सो पाते हैं.
भारद्वाज ने बताया कि जेल में बंद कैदी यहां पूरे मन से काम करते हैं और ज्यादा से ज्यादा काम करके पैसा कमाने का प्रयास करते हैं ताकि उस धन को अपने परिजन को भेज सकें. महीने भर काम करके जब कैदी अपना मेहनताना लेते हैं और फिर उसे बड़े प्यार से अपने परिवार को भेजते हैं तो उनकी आंखों में अपने परिवार से जुड़े होने का एहसास साफ दिखाई देता है.