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'26/11 के बाद डेनमार्क पर हमले की योजना टालनी पड़ी'

मुंबई हमलों के बाद चारों ओर से बढ़े अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण लश्कर-ए-तय्यबा को डेनमार्क के एक अखबार पर हमला करने की अपनी योजना टालनी पड़ी थी.

मुंबई हमलों के बाद चारों ओर से बढ़े अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण लश्कर-ए-तय्यबा को डेनमार्क के एक अखबार पर हमला करने की अपनी योजना टालनी पड़ी थी.इस अखबार ने मोहम्मद साहब के कार्टून छापे थे, जिसका बदला लेने के लिए आतंकवादी गुट ने उस पर हमला करने की योजना बनाई थी.

मुंबई हमलों के मामले में संदिग्ध डेविड कोलमन हेडली ने शिकागो की एक संघीय अदालत में अपने बयान में कहा कि उसे 2009 में लाहौर में उसकी यात्रा के दौरान उसके आकाओं में से एक, साजिद मीर ने बताया था कि 26/11 के बाद लश्कर डेनमार्क अभियान को कुछ दिन के लिए टालना चाहती है. इस हमले को भी मुंबई हमलों की तर्ज पर ही अंजाम देना था.

हेडली ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा ‘लश्कर पर सबकी नजर थी और उस समय वह सुखिर्यों में नहीं आना चाहता था. इसके परिणामस्वरूप, लश्कर ने डेनमार्क अभियान को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया.’ हालांकि हेडली जब फरवरी, 2009 में वजीरिस्तान में अपने एक और आका इलियास कश्मीरी से मिलने गया, तो उसने उसे डेनमार्क अभियान को जल्द से जल्द अंजाम देने को कहा. हेडली ने कहा, ‘कश्मीरी ने कहा कि इस हमले को जल्द से जल्द अंजाम दिया जाना बहुत महत्वपूर्ण है.’

हेडली ने कोपनहेगन में कई स्थानों की टोह लेते हुए वहां के वीडियो बनाए थे. कश्मीरी ने इस बात को लेकर उसकी प्रशंसा भी की. कश्मीरी ने हेडली से इस बात की सलाह भी मांगी कि वहां हमला कैसे किया जाए.

हेडली ने कहा, ‘कश्मीरी ने उन कार्टूनों को शर्मनाक कहा.’ उसके मुताबिक, कश्मीरी अखबार की इमारत के भीतर विस्फोटकों से लदा ट्रक भेजना चाहता था, लेकिन हेडली ने इस पर उससे कहा कि इमारत के रास्ते में बहुत सी बाधाएं हैं और इसलिए यह उचित विकल्प नहीं है.

हेडली के ये सभी बयान मुंबई हमलों के एक और आरोपी तहाव्वुर हुसैन राणा के मामले की सुनवाई के दौरान उसके बयानों का भाग हैं.

संघीय अभियोजकों के सवालों का जवाब देते हुए हेडली ने बताया कि कश्मीरी और उसके एक और पाकिस्तानी आका पाशा ने उसे अखबार पर हमले की एक विस्तृत योजना के बारे में बताया. इस हमले को लंदन में रह रहे उनके कुछ गुर्गों की मदद से अंजाम दिया जाना था.

हेडली के मुताबिक, ‘कश्मीरी ने मुझे बताया कि उसने इंग्लैंड में रह रहे अपने लोगों से इस बारे में बात कर ली है, जिन्हें इस अभियान को अंजाम देना है. उसने मुझे अपने खर्चे के लिए लगभग 80,000 रुपये दिए और डेनमार्क अभियान से जुड़े कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया.’

हेडली ने न्यायाधीशों को बताया कि मुंबई की ही तरह, कश्मीरी इस हमले को ‘जान देने की हद’ तक मजबूत बनाना चाहता था और वह चाहता था कि हमलावरों के कुछ ‘फिदायीन वीडियो’ बनाए जाएं. हेडली के मुताबिक, कश्मीरी ने उससे कहा कि उसे इस बात की आशा है कि कोपनहेगन का हमला, मुंबई हमलों जितना लंबा नहीं चलेगा.

उसने बताया कि पश्चिमी सुरक्षा बल ‘भारतीयों की तरह ढीले’ नहीं हैं और इसलिए जवाबी कार्रवाई बहुत लंबी नहीं चलेगी.

कश्मीरी और पाशा ने योजना बनाई थी कि आतंकवादी लोगों को बंदी बनाएंगे, गोली मार देंगे और उनकी गर्दन काटकर खिड़की से उनके सिर बाहर फेंकना शुरू कर देंगे. उन्होंने लोगों को बंदी बनाने के विचार पर बात भी की.

उसने कहा कि लोगों को पहले गोली मार कर बाद में उनकी गर्दन काटनी थी. इसी बैठक में कश्मीरी ने हेडली को बताया कि उसने लंदन में ‘हत्यारों’ के लिए व्यवस्था कर ली है. जून, 2009 में जब हेडली शिकागो लौट कर आया तो उसने कश्मीरी से मिली पूरी जानकारी राणा से साझा की.

हेडली के मुताबिक, ‘जितना भी विचार-विमर्श हुआ, उसके बारे में राणा को बताया गया.’ उसने बताया, ‘वह इस बात पर सहमत हुआ कि यह एक अच्छा विचार है.’

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