शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक समारोहों में खाने की बर्बादी को ‘अपराध’ बताते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री के वी थामस ने मंगलवार को कहा कि सरकार इस संदर्भ में नया कानून ला सकती है और इसे रोकने के लिए एक जागरुकता अभियान भी शुरू करेगी.
मंत्री ने कहा कि हालांकि सरकार ने शादी-पार्टी जैसे समारोह में खाद्यान्नों की बर्बादी को निर्धारित करने के लिए कोई अध्ययन नहीं कराया है, लेकिन ऐसी रिपोर्ट है कि यह बर्बादी 15 से 20 प्रतिशत तक की है.
थामस ने कहा, शादी विवाह और अन्य सामाजिक समारोहों में खाने की भारी बर्बादी होती है. यह बर्बादी अपराध है. हम ऐसी बर्बादी को रोकने का तरीका ढूंढ रहे हैं.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन और कई सिविल सोयायटी के साथ परामर्श की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि बड़े आयोजनों में खाद्य सामग्रियों की बर्बादी को रोकने का रास्ता सुझाया जा सके.
यह पूछने पर कि क्या सरकार शादी में मेहमानों की संख्या को सीमित करने की योजना बना रही है, थामस ने कहा, हम उस हद तक नहीं जा रहे हैं. हम या तो जागरूकता अभियान शुरू करेंगे या फिर जरूरत हुई तो नया कानून लायेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार 1960 के दशक के गेस्ट कंट्रोल ऑर्डर पर भी गौर कर रही है जो शादी विवाह और अन्य समारोहों में अतिथियों की संख्या की सीमित करता है.
मंत्री ने कहा कि वक्त की मांग है कि इस तरह की बर्बादी को रोका जाये, क्योंकि अभी भी देश की कुछ प्रतिशत आबादी को एक वक्त का ही भोजन मिल पाता है. उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों से परामर्श करने के अलावा सरकार इस मामले पर गौर करने के लिए एक राष्ट्रीय सलाहकार समिति को स्थापित करने पर विचार कर रही है. संप्रग सरकार गरीबों को बेहद सस्ते खाद्यान्न उपलब्ध कराने की कानूनी योग्यता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को लाने की तैयारी में भी है.