पति और ससुराल के साथ कानूनी लड़ाई में एक महिला ने अपने एनआरआई संबंधी के छुट्टियों पर विदेश जाने से रोक लगाने की गुहार अदालत से लगाई, जिसे दिल्ली की एक अदालत ने खारिज कर दिया और कहा कि विदेश जाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजकुमार चौहान ने कहा, ‘‘सभी भारतीय नागरिकों को विदेश जाने का मौलिक अधिकार है. किसी भी भारतीय नागरिक का विदेश जाने का यह अधिकार तर्कसंगत आधार पर ही रोका जा सकता है.’’
अदालत का यह फैसला पूजा वालिया की याचिका की सुनवाई पर आया. याचिका में उन्होंने अपनी संबंधी रश्मि राखी के विदेश जाने पर सुनवाई दंडाधिकारी द्वारा दिए गए आदेश पर रोक लगाने की मांग की जिनके साथ उनकी कानूनी लड़ाई चल रही थी.
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मेरा यह मत है कि सुनवाई अदालत के (विदेश जाने की अनुमति देने के) फैसले में कुछ भी गैर कानूनी और अनौचित्य नहीं था.’’ गुडगांव की रहने वाली पूजा ने अपने पति और रिश्तेदार रश्मि सहित अपने ससुराल वालों पर उत्पीड़न और क्रुरता का आपराधिक मामला दर्ज कराया था.
मामले की सुनवाई अभी भी लंबित है. पूजा का आरोप था कि ब्रिटेन की नागरिक रश्मि के पास ब्रिटिश पासपोर्ट है और उसे गलती से अनुमति दी गई क्योंकि वह सुनवाई का सामना करने के लिए वापस नहीं भी आ सकती है.
न्यायाधीश ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि दंडाधिकारी ने पहले ही रश्मि पर विदेश जाने को लेकर पाबंदियां लगाई हैं और वापस आने पर अदालत के समक्ष हाजिर होने को कहा है.