भ्रष्टाचार और न्यायिक कदाचार के आरोपों में महाभियोग का सामना कर रहे सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पी डी दिनाकरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. दिनाकरन के खिलाफ भूमि कब्जाने और आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में राज्यसभा के सभापति द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय जांच समिति शनिवार को सुनवाई करेगी और उससे एक दिन पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
सूत्रों के मुताबिक समझा जाता है कि 61 वर्षीय दिनाकरन ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को भेजा है. सूत्रों ने कहा, ‘जो कुछ हो रहा था वह उससे खुश नहीं थे और उन्हें यह भी लगता था कि उनके बने रहने से न्यायपालिका को नुकसान होगा.’ न्यायमूर्ति दिनाकरण को समिति की कार्यवाही को रोकने की अनेक कोशिशों में सफलता नहीं मिलने के बाद उच्चतम न्यायालय से भी राहत नहीं मिली.
सूत्रों ने कहा कि उन्हें समिति की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है और यह भी उनके इस्तीफे की एक वजह है. दिनाकरन जब कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे तो उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के तौर पर उनके नाम को मंजूरी दी थी. लेकिन कुछ वकील संगठनों ने जब भ्रष्टाचार और न्यायिक कदाचार के आरोप लगाये तो दिनाकरण की पदोन्नति पर रोक लगा दी गयी.
इससे पहले उनका तबादला मद्रास उच्च न्यायालय से कर्नाटक उच्च न्यायालय में कर दिया गया. आरोपों के बाद उन्हें सिक्किम उच्च न्यायालय भेज दिया गया. हालांकि उन्होंने आरोपों का खंडन किया था. शीर्ष अदालत ने पांच जुलाई को राज्यसभा द्वारा मनोनीत समिति की उनके खिलाफ जांच को अमान्य करार देने की याचिका को खारिज कर दिया था और उन पर देरी करने का आरोप लगाया.
अदालत ने केवल समिति के सदस्य वरिष्ठ वकील पी पी राव को हटाने की उनकी याचिका को मंजूर कर लिया जिनकी निष्पक्षता पर उन्होंने सवाल उठाया था. हालांकि अदालत ने कहा कि दिनाकरन ने जान बूझकर प्रक्रिया में देरी के लिए राव के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई. जबकि प्रक्रिया को तीन महीने में पूरा करना था. अदालत ने कहा था कि समिति के पुनर्गठन से कार्यवाही प्रभावित नहीं होगी और यह उनके खिलाफ पहले ही तय आरोपों पर सुनवाई करेगी.
राज्यसभा के सभापति द्वारा जनवरी 2010 में मनोनीत समिति के प्रमुख उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति आफताब आलम हैं और इसमें राव के अलावा कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर शामिल हैं. तीन सदस्यीय समिति को 12 आरोपों के मामले में जांच पड़ताल करनी थी जिस पर सदन ने प्रस्ताव पारित किया था. दिनाकरन ने इस आधार पर कार्यवाही को चुनौती दी थी कि समिति ने अतिरिक्त आरोप तय किये.
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