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चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन का लंदन में निधन

जाने-माने भारतीय चित्रकार और ‘भारत के पिकासो’ के नाम से चर्चित मकबूल फिदा हुसैन का लंदन के अस्पताल में निधन हो गया.

मकबूल फिदा हुसैन मकबूल फिदा हुसैन

जाने-माने भारतीय चित्रकार और ‘भारत के पिकासो’ के नाम से चर्चित मकबूल फिदा हुसैन का लंदन के अस्पताल में निधन हो गया. अपनी कलाकृतियों से प्रसिद्धि पाने के साथ विवादों में घिरने वाले 95 वर्षीय हुसैन लगभग एक महीने से बीमार थे.

पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि हुसैन ने रॉयल ब्रोम्प्टन अस्पताल में स्थानीय समयानुसार तड़के ढाई बजे (भारतीय समयानुसार सात बजे) अंतिम सांस ली. उनकी पिछले डेढ़ महीने से तबीयत ठीक नहीं थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

यह अभी नहीं पता चल सका है कि पद्म विभूषण से सम्मानित हुसैन ने क्या अपने अंतिम संस्कार को लेकर कोई इच्छा जाहिर की थी. परिवार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अंतिम संस्कार के बारे में अभी कोई फैसला किया जाना बाकी है.

फरवरी, 2006 में हुसैन पर हिंदू देवी-देवताओं की नग्न तस्वीरों को लेकर लोगों की भावनाएं भड़काने का आरोप लगा. हुसैन के खिलाफ इस संबंध में कई मामले चले. ऐसे ही एक अदालती मामले में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी हुआ क्योंकि उन्होंने समन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलीं.

हुसैन ने देश छोड़ने के पहले कहा, ‘‘कानूनी तौर पर मामले इतने जटिल हैं कि मुझे घर न लौटने की सलाह दी गई है.’’ इस बात की आशंकाएं थीं कि उनके लौटने पर उन्हें उनके खिलाफ चल रहे मामलों को लेकर गिरफ्तार कर लिया जाएगा, इसके बाद भी उन्होंने घर लौटने की तीव्र इच्छा जताई थी.

हुसैन 1940 के दशक के अंत से ही प्रसिद्धि पा चुके थे. वह 1947 में फ्रांसिस न्यूटन सूजा द्वारा स्थापित प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप में शामिल हो गए. यह ग्रुप भारतीय कलाकारों के लिए नई शैलियां तलाशने और बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट द्वारा स्थापित परंपराओं को तोड़ने के इच्छुक युवा कलाकारों के लिए बनाया गया था.

पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित हुसैन भारत के कलाकारों में सबसे ज्यादा धन पाने वाले कलाकारों में से एक रहे. उनकी एक कलाकृति क्रिस्टीज की नीलामी में 20 लाख डॉलर में बिकी.

हुसैन की ‘बैटल ऑफ गंगा एंड यमुना : महाभारत 12’ वर्ष 2008 में एक नीलामी में 16 लाख डॉलर में बिकी और यह क्रिस्टी के साउथ एशियन मॉडर्न एंड कंटेम्परेरी आर्ट की बिक्री में एक नया रिकॉर्ड था.

उन्होंने अपनी पसंदीदा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को लेकर ‘गज गामिनी’ बनाई तथा कुछ और फिल्मों पर भी काम किया. माधुरी को लेकर ‘गज गामिनी’ फिल्म के बाद हुसैन ने तब्बू को लेकर ‘मीनाक्षी : ए टेल ऑफ थ्री सिटीज’ का निर्माण किया. हुसैन ने अभिनेत्री अमृता राव की भी कई तस्वीरें बनाई.

विवाद हमेशा हुसैन के साथ रहे. उन्हें 92 साल की उम्र में केरल सरकार की ओर से प्रतिष्ठित राजा रवि वर्मा पुरस्कार दिया जाना था. इस घोषणा ने प्रदेश में खासा विवाद खड़ा कर दिया.

इस मामले को लेकर सबरीमाला के प्रवक्ता राहुल ईश्वर केरल उच्च न्यायालय चले गए. अदालत ने याचिका के निस्तारण तक पुरस्कार देने पर स्थगन का अंतरिम आदेश दे दिया.

हुसैन को अम्मान स्थित रॉयल इस्लामिक स्ट्रैटेजिक स्टडीज सेंटर ने दुनिया के सबसे प्रभावशाली 500 मुस्लिमों की सूची में भी शामिल किया.

उन्हें बर्लिन फिल्म समारोह में उनकी फिल्म ‘थ्रू दि आईज ऑफ ए पेंटर’ के लिए गोल्डन बीयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया. वह 1971 में साओ पाओलो आर्ट बाईनियल में पिकासो के साथ विशेष आमंत्रित अतिथि थे.

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