गुजरात के राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री से सलाह किए बिना वहां के लोकायुक्त की नियुक्ति किए जाने पर सख्त आपत्ति जताते हुए भाजपा ने संप्रग सरकार को चेतावनी दी कि अगर उसकी ओर से नरेन्द्र मोदी सरकार पर बार बार प्रहार होते रहे तो मुख्य विपक्षी दल का केन्द्र से सहयोग करना मुश्किल होगा.
भाजपा संसदीय दल के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने लोकसभा में यह चेतावनी दी. उन्होंने प्रणव मुखर्जी से मुखातिब होते हुए कहा कि सदन के नेता हमसे सहयोग चाहते हैं, ‘लेकिन मैंने उनसे गुजरात के प्रति केन्द्र के रवैये की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि जब तक संघीय ढांचे का आदर नहीं होगा, हमें सरकार से सहयोग करने में दिक्कत होती है.
हमारे लोग हमसे कहते हैं कि इस आचरण पर हम उनसे (केन्द्र) सहयोग क्यों करें.’ उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा गुजरात के लोकायुक्त का नियुक्त किया जाना ‘गुजरात में संघात्मक ढांचे पर कोई पहला प्रहार नहीं है. ऐसे प्रहार लगातार होते रहे हैं.
उन्होंने कहा कि राज्यपाल के इस आचरण को लेकर उनका दल राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा और उन्हें वापस बुलाए जाने की मांग करेगा.
आडवाणी ने कहा कि संघात्मक ढांचा हमारे संविधान का मुख्य हिस्सा है और गुजरात पर लगातार जिस तरह से संघात्मक ढांचे पर केन्द्र की ओर से प्रहार हो रहा है, वह बहुत खेद की बात है.
उन्होंने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पार्टी ने कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है.
आडवाणी ने कहा कि हिंदुस्तान के इतिहास में किसी प्रदेश में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि कोई राज्यपाल मुख्यमंत्री से सलाह लिए बिना लोकायुक्त की नियुक्ति कर दे. सत्ता पक्ष के सदस्यों की भारी टोकाटोकी के बीच आडवाणी ने कहा कि राज्यपाल निष्पक्ष होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस राज्य का वह प्रतिनिधित्व करते हैं, उसके संघात्मक ढांचे पर केन्द्र की ओर से बार बार प्रहार किया जा रहा है.
संसद में गुजरात का प्रतिनिधित्व करने वाले आडवाणी ने कहा कि गुजरात में प्रावधान है कि कार्यपालिका उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता की सलाह से लोकायुक्त की नियुक्ति करती है.
उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री ने वर्ष 2006 में लोकायुक्त की नियुक्ति का फैसला किया था लेकिन विपक्ष के नेता के ‘असहयोग’ और कुछ अन्य कारणों के चलते लोकायुक्त की नियुक्ति में विलंब होता रहा.
भाजपा के हरीन पाठक ने आज लोकसभा में प्रश्नकाल स्थगित कर इस इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए नोटिस दिया था.
गौरतलब है कि गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल ने कथित रूप से नरेन्द्र मोदी सरकार से विचार विमर्श किये बिना आर ए मेहता को लोकायुक्त नियुक्त किया है.
सदन की बैठक शुरू होने से पूर्व इस मुद्दे को लेकर आडवाणी ने गुजरात से 15 अन्य भाजपा सांसदों के साथ संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया.
आडवाणी ने संवाददाताओं से कहा, हम इस विषय पर एक या दो सितंबर को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात करेंगे जब वह राजधानी वापस लौटेंगी. नियुक्ति से पहले मुख्यमंत्री से सलाह करने या मंत्रिपरिषद की सलाह लेने जैसे स्थापित चलन को नजरंदाज किया गया. राज्यपाल ने सभी स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हुए लोकायुक्त की नियुक्ति की है.’ भाजपा सदस्य नारेबाजी कर रहे थे और उनके हाथों में पर्चे थे, जिस पर लिखा था, गुजरात में लोकतंत्र की हत्या की अनुमति नहीं दी जायेगी. गुजरात का राजभवन कांग्रेस भवन बन गया है.’