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दशहरा रैली में मर्यादा भूले बाल ठाकरे

मुंबई के शिवाजी पार्क में दशहरा के बहाने शिवसेना की ये सियासत 46 साल से चली आ रही है जिसे एक बार फिर शिवसेना सुप्रीमो ने ना सिर्फ सोनिया पर निशाना साधने का मंच बनाया बल्कि मर्यादा भी भूल बैठे.

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बाल ठाकरे
बाल ठाकरे

मुंबई के शिवाजी पार्क में दशहरा के बहाने शिवसेना की ये सियासत 46 साल से चली आ रही है जिसे एक बार फिर शिवसेना सुप्रीमो ने ना सिर्फ सोनिया पर निशाना साधने का मंच बनाया बल्कि मर्यादा भी भूल बैठे.

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बाल ठाकरे ने भरी सभा में पीएम की नकल उतारी और खिल्ली उड़ाई. उन्‍होंने कहा, 'पीएम खुद नहीं समझ सकते कि वो क्या बोल रहे हैं. एक मजबूत आदमी की जरूरत है.' वो जो कहते हैं, देशवाले तक नहीं समझते तो दुश्मन क्या समझेंगे.

मुंबई के शिवाजी पार्क में सियासी रावण फूंका गया. सियासी इसलिए कि इसमें शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे मौजूद थे और उन्होंने चुन-चुनकर हर नेता पर निशाना साधा. अगर हैरानी थी तो ये कि उन्होंने अपने भतीजे राज ठाकरे का नाम तक नहीं लिया जिनसे पार्टी को सबसे ज्यादा खतरा है.

ठाकरे ने अन्ना हजारे पर निशाना साधा. ठाकरे ने अन्ना के अनशन को फाइव स्टार अनशन तो कहा ही, अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी को माइक प्रेमी करार दिया. शिवसेना सुप्रीमो की टिप्पणी पर अन्ना ने जवाब दिया. अन्‍ना ने कहा कि अपमान सहन करने की शक्ति होनी चाहिए.

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बीएमसी चुनाव सिर पर है और रावण के बहाने शिवसेना शक्तिप्रदर्शन नहीं करती, ऐसा कैसे हो सकता है. मुंबई के शिवाजी पार्क में दशानन का दहन हुआ तो एक साल बाद खुद शिवसेना सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे सभी के सामने आए. हर बार की तरह अपने अंदाज में बात की.

लेकिन सोनिया गांधी का जिक्र करते ही बीमारी में भी सियासत नजर आने लगी. ठाकरे ने हा, 'सोनिया गांधी एक महीने तक विदेश में रहीं. वो विदेश में ऐसा क्या कर रही थीं, जो यहां पर रहकर नहीं हो सकता था. मेरा बाइपास हुआ तो वो यहीं भारत में हुआ.'

शिवसेना सुप्रीमो के इस सियासी हमले में अपना आखिरी गढ़ बचाने की जद्दोजहद दिखती है. मुंबई में पार्टी सिर्फ बीएमसी में बची रह गई है और नैया पार लगाने के लिए अब रावण का सहारा है.

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