बात सिर्फ 13 दिन पुरानी है. आपको याद होगा मेरठ की एक दुल्हन ने अपने पति को राखी बांध कर उसे अपना भाई बना लिया था और बाकायदा कैमरे पर इसका एलान भी किया था. पर 13 दिन बाद अब फिर एक बार इस फेरे का एक नया फेर सामने आया है. दुल्हन ने अब भाई को अपना पति बना लिया है. जी हां. कैंलेंडर के पन्ने छोड़िए, सिर्फ तारीखें बदलीं और 13 दिन में ही एक बार फिर पूरा रिश्ता बदल गया. पति को भाई बनाने वाली हिंदुस्तान की इकलौती बीवी ने अबकी अपने भाई को ही अपना पति बना लिया.
सिर्फ 13 दिन पहले आरती ये चीख-चीख कर पूरी दुनिया को ना सिर्फ बता रही थी बल्कि दिखा भी रही थी कि कैसे उसने अपने पति की कलाई पर राखी बांध कर उसे अपना भाई बना लिया है. आरती के इस फैसले और उसकी हरकत से हर कोई सन्न था. भला कोई बीवी अपने ही पति को राखी कैसे बांध सकती है? कैसे पति को अपना भाई बना सकती है? तो फकत 13 दिन अब आरती का ये सच सामने आ ही गया. आरती ने एक बार फिर यू-टर्न मारा है और इस यू-टर्न के साथ इस बार उसने अपने भाई को ही अपना पति बना लिया.
आरती 16 जून की हर हरकत को अब झूठ बता रही है. शादी पति, और भाई के रिश्ते को उसने ऐसा उलझा दिया है कि खुद सुलझाने वाले की शामत आ जाए. पर चलिए हम कोशिश करेंगे कि आपको रिश्ते की इस अजीबो-गरीब पहेली को हलके-फुलके तरीके से समझा पाएं. रिश्तों की ये पहेली कितनी उलझी हई है ये इसी से पता चलता है कि सगाई से सुहागरात के बीच दो दुल्हन और चार रिश्ते बदल गए और कमाल ये है कि नए रिश्तों की ये गिनती आगे तक ना जाए इसकी कोई गारंटी भी नहीं है.
मेरठ का नीतीश और उत्तराखंड के रुद्रपुर की आरती रिश्तों के अजीबोगरीब डोर में उलझी है इन दोनों की ज़िंदगी 16 जून को नीतीश जिस आरती से अपनी कलाई में राखी बंधवा रहा था, उसी के साथ उसने 6 मई को अग्नि को साक्षी मान कर लिए थे सात फेरे. जो आरती अपने मायके से मेरठ बहू बनकर आई थी, वो 40 दिन में अपने पति की बहन और सास-ससुर की बेटी क्यों बनी.?
नीतीश के माता-पिता भी जिस आरती को बड़े अरमान से बहू बनाकर घर लाए थे, वो भी अब उसे बेटी मान चुके थे और अब आरती को उसकी पसंद के लड़के के साथ विदा करने की तैयारी में थे. पर इस बदलते रिश्ते ने फिर करवट बदली और 29 जून को आरती एक बार फिर पलट गई. अपने जिस पति नीतीश को 16 जून को उसने राखी बांधी थी उसी भाई को अब फिर वो अपना पति बता रही है.
आरती अब नई कहानी लेकर सामने आई है. बकौल आरती 16 जून को पति को राखी बांधने का सारा ड्रामा उसकी मर्जी के खिलाफ हुआ था. ससुराल वालों ने उसपर दबाव डाला था इसलिए उसे ये सब करना पड़ा. आरती का इलजाम है कि उसके ससुराल वाले दहेज के लिए उसे तंग कर रहे थे. पर आरती ये नहीं बता पाई कि दहेज मंगने के लिए भला ससुराल वाले पति के हाथों अपनी पत्नी को राखी क्यों बंधवाएंगे.?
16 जून को आरती ने कहा था कि नीतीश से उसकी शादी जबरन कराई गई थी. जबकि वो तो पहले से शादीशुदा थी. विनीत नाम के लड़के से उसने मंदिर में शादी की थी. पर अब वही आरती कह रही है कि नीतीश से पहले उसकी कोई शादी नहीं हुई थी. विनीत से उसकी शादी नीतीश के घरवालों ने जबरन हाल में कराई. सवाल फिर वही है. मसला अगर सिर्फ दहेज का है तो नीतीश अपनी ही बीवी की जबरन दूसरी शादी क्यों करवाएगा? आरती के पास इसका भी जवाब नहीं है.
अब आरती पहले सच कह रही थी या अब. ये तो वही जाने. पर जिस पति को उसने पहले राखी बांधी और अब फिर पति मान रही है, उसी पति या भाई को अब वो जेल की सलाखों के पीछे देखना चाहती है. वैसे आपको बता दें कि आरती और नीतीश के रिश्तों का पेच नीतीश की सगाई के बाद से ही उलझना शुरू हो गया था. नीतीश हालात के जाल में ना उलझता, तो आरती उसकी बीवी या बहन बनने की बजाय साली होती. लेकिन एक ग़लती सुधारने के चक्कर में सब ग़ड़बड़झाला हो गया.
आरती से नीतीश की शादी हुई तब तक सब ठीक था, लेकिन सुहागरात को आरती ने नीतीश को अपनी जिंदगी के बारे में जैसे ही बताया पूरी कहानी पलट गई. आरती के गले से नीतीश के नाम का मंगलसूत्र छूटा और नीतीश की कलाई पर बंध गई आरती की राखी. शहनाई बज रही थी, चारो तरफ बधाइयों के गीत-संगीत बज रहे थे. मेरठ के नीतीश की जिंदगी को खुशियों से भरने के लिए कोई आ रही थी. पिछले 6 मई को नीतीश की शादी रुद्रपुर की आरती के साथ हुई. जिस समय आरती के साथ नीतीश सात फेरे ले रहा था, तब शायद उसे इस बात का हल्का सा भी एहसास नहीं रहा होगा कि नियति उसका कैसा इम्तिहान लेने वाली है.
शादी के बाद जब अपनी नई नवेली दुल्हन आरती को लेकर नीतीश अपने घर मेरठ के देवलोक कॉलोनी में पहुंचा, तब उसके लिए उसकी दुनिया किसी देवलोक से कम नहीं थी. नई जिंदगी के सुहाने सपने उसमें चार चांद लगा रहे थे. लेकिन सुहागरात को ही आरती ने नीतीश को जो कुछ बताया, उससे नीतीश के पैरों तले से जमीन खिसक गयी. आरती ने नीतीश को बताया कि वो किसी और से प्यार करती है. ना सिर्फ प्यार करती है, बल्कि मंदिर में उससे शादी भी कर चुकी है.
अपनी बात की तस्दीक के लिए आरती ने नीतीश को वो तस्वीर भी दिखायी, जिसमें आरती और उसका प्रेमी विनीत एक दूसरे को माला पहना रहे हैं. आरती ने नीतीश को बताया कि वो और विनीत रूद्रपुर में साथ ही पढ़ते थे. पढ़ते हुए ही दोस्ती हुई और दोस्ती कब आशिकी में बदल गयी, ये उन्हें पता ही नहीं चला. आरती को लगता था कि उसके घर वाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होंगे. इसीलिए उसने गुपचुप तरीके से मंदिर में शादी कर ली थी.
अब सवाल उठता है कि जब आरती पहले ही शादी कर चुकी थी, तो उसने नीतीश के साथ शादी करने से मना क्यों नहीं कर दिया. इस पर आरती का कहना है कि जब उसे पता चला कि उसकी शादी नीतीश के साथ जबरन करायी जा रही है तो उसने इसका पूरा विरोध किया था. लेकिन घर वालों ने शादी के दिन उसे खाने में कुछ मिला दिया था, जिससे शादी के समय वो बेहोश हो गयी थी. हालांकि यहां ये सवाल उठता है कि जब वो बेहोश थी, तो फिर शादी हुई कैसे. क्या शादी के वक्त मौजूद किसी को भी इसमें कुछ अटपटा नहीं लगा होगा.
नीतीश के लिए आरती का खुलासा किसी सदमे से कम नहीं था. लेकिन उसी समय उसने तय कर लिया था कि वो आरती को उसके पूर्व पति से मिलवाने की ठान ली और इसमें मदद के लिए आगे आगे नीतीश के मां-बाप. आरती और नीतीश के रिश्ते को कोई गलत ना समझे, इसके लिए नीतीश ने आरती को अपनी बहन मान लिया. जिसके साथ सात फेरे लिया था, उसी से अपनी कलाई पर बंधवा ली राखी और इसके साथ ही पति-पत्नी का रिश्ता बदल गया भाई-बहन के रिश्ते में.
दरअसल नीतीश की शादी पहले आरती की बड़ी बहन नेहा से तय हुई थी. शादी के कार्ड भी छप गये थे. लेकिन शादी से ऐन पहले कुछ ऐसा गड़बड़झाला हुआ कि मंडप में दुल्हन बनकर नेहा की बहन आरती जा बैठी. नेहा शादी से पंद्रह दिन पहले ही घर छोड़कर भाग गयी. शादी से पहले नेहा के घर से भागने के बाद दुल्हन बनी छोटी बहन. नीतीश के घरवालों के मुताबिक, नेहा का पहले से ही अनिल नाम के एक लड़के से चक्कर चल रहा था.
घरवालों के दबाव में नेहा ने नीतीश से सगाई तो कर ली, लेकिन इस रिश्ते के लिए वो कतई तैयार नहीं थी. तब तक लड़के और लड़की दोनो के परिवार वालों ने शादी का कार्ड भी छपवा दिया था. कार्ड का बाकायदा नेहा और नीतीश का ही नाम था. जिस बेटी के हाथों में शादी की मेहंदी रची जानी थी, वही बेटी भाग गयी तो घर वालों को अपनी विरादरी में अपनी नाक कटने का डर सताने लगा. अब अपनी इज्जत की खातिर नेहा के घर वाले नीतीश के मां-बाप से विनती करने लगे. उनका कहना था कि चूंकि शादी का कार्ड भी बंट चुका है, हर कोई शादी के बारे में जान चुका है, लिहाजा नेहा की जगह उसकी छोटी बहन आरती से ही नीतीश शादी कर ले.
देखने-सुनने में आरती अपनी बड़ी बहन नेहा से कहीं ज्यादा खूबसूरत और अच्छी थी. फिर नीतीश के घरवालों के लिए ये इज्जत का सवाल बन गया था. इस लिए दोनो परिवारों की इज्जत की खातिर तय समय पर ही नीतीश और आरती की शादी हो गयी. शादी के कार्ड पर नीतीश और नेहा का नाम था लेकिन शादी के मंच पर एक दूसरे को जयमाल पहना रहे थे नीतीश और आरती. अच्छी-भली और पढ़ी-लिखी बीवी पाकर नीतीश भी निहाल हो गया. उसे लगा कि उसके सपनों की रानी उसे मिल गयी है. लेकिन वक्त तो नीतीश का कुछ और इम्तिहान लेने की ताक में खड़ा था.