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हेलिकॉप्टर सौदा: करोड़ों की दलाली बेपर्दा

वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीद में दलाली का खेल खुल चुका है. इटली के जांचकर्ताओं ने कहा है कि पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एसपी त्यागी के बंधुओं (कजिन) को कैश मिला. दो नकली कंपनियां बनाई गईं, जिन्हें भुगतान किया गया. इसके अलावा हथियारों के डीलर क्रिस्चन मिशेल को भी पैसा मिला. जांच में 51 मिलियन यूरो के हिसाब-किताब का आकलन हुआ है.

वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीद में दलाली का खेल खुल चुका है. इटली के जांचकर्ताओं ने कहा है कि पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एसपी त्यागी के बंधुओं (कजिन) को कैश मिला. दो नकली कंपनियां बनाई गईं, जिन्हें भुगतान किया गया. इसके अलावा हथियारों के डीलर क्रिस्चन मिशेल को भी पैसा मिला. जांच में 51 मिलियन यूरो के हिसाब-किताब का आकलन हुआ है.

जांचकर्ताओं की रिपोर्ट कहती है कि त्यागी बंधुओं, जूली, डॉक्सा और संदीप, को 10 हजार यूरो कैश में मिला. ये तीनों पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एसपी त्यागी के कजिन हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, इन्होंने दो गैर-जरूरी (बोगस) कंपनियां बनाकर अंशों में एक बड़ी राशि हासिल की. इन्होंने 'आईडीएस इंडिया' और 'आईडीएस ट्यूनिशिया' के नाम से दो कंपनियां बनाई थीं. इन कंपनियों का काम भारतीय अधिकारियों को रिश्वत खिलाना और अगस्तावेस्टलैंड चोपर्स के हक में डील को ला देना था. इन दो कंपनियों के मालिकों को भारी-भरकम 21 मिलियन यूरो की राशि मिली. कुल मिलाकर हेलिकॉप्टर डील के लिए 51 मिलियन यूरो का भुगतान किया गया.

त्यागी बंधुओं के अतिरिक्त एक अन्य बिचौलिए क्रिस्चन मिशेल को भी 30 मिलियन यूरो के भुगतान होने की खबर है. कहा जा रहा है कि मिशेल को इटेलियन कंपनी ने अपनी सुविधा के लिए गुडो हास्के साथ रखा था. मिशेल सीधा फिनमेक्कानिका के बॉस गुसपी ओर्सी को रिपोर्ट करता था.

बिचौलियों का कहना है कि उन्होंने कुल भुगतान का 60 प्रतिशत हिस्सा त्यागी परिवार को कमिशन के तौर पर चला गया था. बाकी पैसा डील को आसान बनाने वालों (फैसिलिटेसर्स) को मिला.

'आईडीएस इंडिया' (IDS India) और 'आईडीएस ट्यूनिशिया' (IDS Tunisia) कंपनियों के मालिकों के नाम पर अब भी रहस्य बरकरार है. इन दोनों कपंनियों ने कई बार उन कार्यों का झूठा इन्वॉयस तैयार किया, जो भारत में कभी हुए ही नहीं. रिपोर्ट के अनुसार कंपनी को एक निश्चित समयावधि के लिए हर महीने 5 लाख 10 हजार यूरो का भुगतान होता रहा है.

2010 में जब हेलिकॉप्टर डील साइन की गई तब 6,120,000 यूरो का भुगतान इस कंपनी को हुआ. 2011 में भी 6,392,020 यूरो कंपनी के खाते में भेजे गए. ये पैसे उन कार्यों के लिए थे, जो कभी किए ही नहीं गए.

जांच में पता चला है कि एक बिचौलिया भारत के पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एसपी त्यागी उनके कजिन के ऑफिस में 2006 में मिला था. उसके साथ कार्लो गेरोसा था. गेरोसा भी एक बिचौलिया है. वह एसपी त्यागी के कजिन से भी मिला. इस मुलाकात में AW101 हेलिकॉप्टर के फीचर्स पर चर्चा की गई. इस मीटिंग में जो पेपर दिखाए गए वे अगस्तावेस्टलैंड की ओर से तैयार किए थे. जांच साफ साफ कहती है कि कंपनी ने भारतीय नियमों पर चलने की बजाय बिचौलियों के सहारे डील हासिल करने की कोशिश की और डील हासिल भी की.

यही नहीं, जांच में पता चला है कि त्यागी के कजिन जूली को भी भारतीय वायुसेना का पूर्व अधिकारी बताया गया है, जबकि भारतीय वायुसेना का कहना है कि वह कभी सेना में अधिकारी नहीं रहा. वह अपनी ट्रेनिंग पूरी किए बिना ही सेना को छोड़ चुका था.

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