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26/11 में आईएसआई का निचले स्‍तर का स्‍टॉफ शामिल: पूर्व पाक मंत्री

लश्कर ए तैयबा के एक आतंकी के खिलाफ अमेरिका में चल रही सुनवाई के दौरान मुंबई हमलों में आईएसआई की संलिप्तता सामने आने के बाद पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शहरयार खान ने कहा है कि इन हमलों में शायद खुफिया एजेंसी के निचले स्तर के कुछ तत्व शामिल रहे होंगे.

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लश्कर ए तैयबा के एक आतंकी के खिलाफ अमेरिका में चल रही सुनवाई के दौरान मुंबई हमलों में आईएसआई की संलिप्तता सामने आने के बाद पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शहरयार खान ने कहा है कि इन हमलों में शायद खुफिया एजेंसी के निचले स्तर के कुछ तत्व शामिल रहे होंगे.

बहरहाल, उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में संदेह है कि मुंबई हमलों जैसा कुछ हुआ हो तो उसमें आईएसआई और सेना जैसे प्रतिष्ठान लिप्त रहे होंगे क्योंकि ऐसा होने पर इसके परिणाम भी मिलते. खान ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘मेरी राय में, इसमें कोई संदेह नहीं है कि मेजर इकबाल जो भी हो, वह इस व्यक्ति डेविड हेडली के संपर्क में था.’

पूर्व विदेश मंत्री से मुंबई हमलों में आईएसआई के एक अधिकारी की संलिप्तता के बारे में पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा की सुनवाई से सामने आए प्रमाण के बारे में पूछा गया था.उन्होंने कहा, ‘लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या मेजर इकबाल आईएसआई के निर्देशों के तहत काम कर रहा था यह वह उन लोगों में से एक था जो प्रतिष्ठान में सबसे निचले स्तर पर थे और खुद यह काम कर रहे थे.’

खान ने कहा कि वह आतंकी तत्वों के साथ आईएसआई के निचले स्तर के कर्मचारियों की संलिप्तता को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरी राय में, मैं इसे स्वीकार करूंगा.’ पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के जिहादियों के हाथ पड़ने की आशंका के बारे में खान ने कहा कि उन्हें इन हथियारों की सुरक्षा को लेकर पूरा भरोसा है.

उनसे पूछा गया कि क्या वह इस आशंका को पूरी तरह खारिज करते हैं कि जिहादी तत्वों से सहानुभूति रखने वाले लोग फौज में हों और परमाणु शस्त्र उनके हाथ लग जाएं। इस पर पूर्व विदेश मंत्री ने कहा, ‘मैं 100 फीसदी आश्वस्त तो नहीं होऊंगा लेकिन 99 फीसदी आश्वस्त जरूर हूं कि ऐसा नहीं होने दिया जाएगा.’

भारत विरोधी समूहों के खिलाफ पाक सेना द्वारा कठोर कार्रवाई न करने की धारणा के बारे में खान ने कहा कि पाकिस्तान में यह भावना है कि इस रवैये को बदलना होगा. उन्होंने कहा, ‘कराची में बिन लादेन के बाद उन्हें सोचना चाहिए कि भारत नहीं बल्कि आतंकवाद ही बड़ी चिंता है. निश्चित रूप से सेना भी इस बात को स्वीकारेगी.’

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