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देर रात सचिन पायलट को आया प्रियंका का फोन, सुबह-सुबह अचानक दौसा पहुंचे पूर्व डिप्टी CM

कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट को मनाने की कोशिश की. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने देर रात सचिन पायलट को फोन किया और समाधान का भरोसा दिया गया है.

पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रियंका ने सचिन को दिया समाधान का भरोसा
  • सचिन पायलट आज आएंगे दिल्ली, साधी चुप्पी

राजस्थान में सियासी हलचल तेज हो गई है. सुलह कमेटी की रिपोर्ट को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट नाराज हैं. कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट को मनाने की कोशिश की. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने देर रात सचिन पायलट को फोन किया और समाधान का भरोसा दिया गया है.

इस बीच खबर है कि सचिन पायलट इस मामले पर आज चुप रहेंगे और दिल्ली जाएंगे.इस बीच अचानक सचिन पायलट सुबह-सुबह दौसा पहुंच गए. यहां वह अपने पिता स्व. राजेश पायलट को श्रद्धांजलि दे रहे हैं. उनके साथ करीब आधा दर्जन विधायक हैं.

इस बीच सचिन पायलट गुट के इस्तीफ़ा देने वाले विधायक हेमाराम चौधरी देर रात जयपुर पहुंच गये हैं. वो आज विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से मिलेंगे. विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा था कि व्यक्तिगत मिलने के बाद ही इस्तीफे पर फैसला होगा.

क्या है पूरा मामला
देश की ग्रांड ओल्ड पार्टी कांग्रेस इन दिनों संकट से जूझ रही है. जितिन प्रसाद ने कांग्रेस छोड़ दिया. नवोजत सिंह सिद्धू और सचिन पायलट नाराज चल रहे हैं. कांग्रेस में मंथन और चिंतन का दौर चल रहा है. फिलहाल, सचिन पायलट मौन हैं, लेकिन उनके मौन की वजह असंतोष है. नाराजगी के पीछे वो वादे है जो पूरे नहीं हुए. 

पायलट समर्थित विधायक पूछ रहे है कि पंजाब में विवाद का समाधान 10 दिन में हो गया तो राजस्थान में 10 महीनों बाद भी रास्ता क्यों नहीं मिला? कांग्रेस पार्टी के महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह ने भी कहा कि सचिन पायलट से किए गए वादे पूरे होने चाहिए. एक तरफ कांग्रेस में मंथन जारी है तो दूसरी तरफ सचिन पायलट ने कल घर पर मीटिंग की.

बीते साल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट का मतभेद हुआ था. कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद सचिन पायलट मान गए थे. सरकार में सचिन पायलट की भागीदारी बढ़ाने का वादा किया गया था. पायलट गुट के विधायकों को मंत्री या फिर राज्य के किसी बोर्ड में सदस्य या चेयरमैन बनाने का भी वादा किया गया था.

कलह समाप्त कराने के लिए अस्थाई समाधान तो निकल गया था लेकिन विवाद जस का तस है. पार्टी के अंदर और बाहर मतभेद और मनभेद साफ सुनाई दे रहे हैंय गहलोत सरकार के मंत्री तो यहां तक दावा कर रहे है कि सरकार को कोई खतरा नहीं. राजस्थान में सियासी खिचड़ी पक रही है लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता सबकुछ सामान्य बता रहे हैं.

 

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