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राजस्थान: श्रीगंगानगर, यहां राजाओं के नाम से है हर विधानसभा सीट की पहचान

राजस्थान का श्रीगंगानगर शहर, जिसका नाम एक महाराजा के नाम पर है और इस जिले की सभी सीटों के नाम भी किसी ना किसी महाराजा के नाम पर है.

श्रीगंगानगर स्टेशन श्रीगंगानगर स्टेशन

राजस्थान के श्रीगंगानगर को 'राजस्थान का अन्नदाता' या 'राजस्थान का पंजाब' कहा जाता है. वैसे तो गंगानगर का इतिहास काफी पुराना है, लेकिन इसका चुनावी इतिहास भी काफी रोचक है. श्रीगंगानगर की हर विधानसभा सीट की अपनी अलग कहानी है और यहां आदमियों में ही नहीं बल्कि विधानसभा सीट में भी 'श्री' लगाने का चलन है. इसलिए 'गंगानगर' को भी 'श्रीगंगानगर' के नाम से जाना जाता है.

श्रीगंगानगर की बात करें तो बीकानेर के पूर्व शासक गंगासिंह ने 1923 से 1925 के बीच बीकानेर कनाल बन कर तैयार हुई. 1927 में इस नहर में पानी आया और इसके बाद गंगानगर शहर की असली बसावट शुरू हुई. गंगानगर के बारे में एक बेहद दिलचस्प बात यह है कि 1927 से पहले यह शहर बीकानेर की मिर्जेवाला तहसील का एक छोटा सा गांव रामू की ढाणी या रामनगर था. आज मिर्जेवाला खुद गंगानगर तहसील का एक गांव है और रामनगर इलाका इन दिनों गंगानगर की पुरानी आबादी के नाम से जाना जाता है.

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मौजूदा गंगानगर की भौगोलिक सीमाएं देखें तो यह राजस्थान का सबसे उत्तरी जिला है. इसकी सीमा पूर्व में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले, दक्षिण में बीकानेर, पश्चिम में पाकिस्तानी पंजाब के बहावलपुर जिले और उत्तर में भारतीय पंजाब के अबोहर से लगती है. यानी इस शहर का भूगोल अपने आप में ही इसे खास बना देता है. बता दें कि यहां की सीटों के नाम राजा-महाराजों के नाम से रखा गए थे, जिसकी वजह से इनके आदर के रूप में श्री लगाया जाने लगा.

श्रीगंगानगर विधानसभा- गंगानगर का नाम गंगा सिंह के नाम पर पड़ा था. हालांकि इस सीट में गंगानगर के आगे श्री लगा दिया जाता है, जिसकी वजह से इसे श्रीगंगानगर कहते हैं.

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श्रीकरणपुर विधानसभा- यह क्षेत्र भारत-पाकिस्तान से सटा है और पहले इसके नाम रत्तीथेड़ी हुआ करता था. यह नाम भी गंगासिंह के पौते करणीसिंह के नाम पर रखा गया. आदर के लिए इस सीट के नाम के आगे भी श्री लगाया जाता है और इसका नाम श्रीकरणपुर हो गया है.

अनूपगढ़ विधानसभा- साल 1677-78 में मुगल शासक औरंगजेब ने महाराजा अनूप सिंह को औरंगाबाद का शासक नियुक्त किया. अनूप सिंह की सेना ने भाटियों को हराकर गढ़ पर कब्जा कर लिया. अनूप सिंह ने गढ़ का निर्माण किया, जिसका नाम अनूपगढ़ रखा गया.

रायसिंह नगर विधानसभा- इस सीट का नाम बीकानेर के छठे महाराजा रायसिंह के नाम पर रायसिंहनगर रखा गया. वहीं इस क्षेत्र में एक स्थान है, इसी विधानसभा के क्षेत्र के श्रीबिजयनगर कस्बे का नाम बीकानेर के पूर्व महाराजा गंगा सिंह के छोटे सुपुत्र प्रिंस बिजय सिंह के नाम पर रखा गया.

सूरतगढ़ विधानसभा- साल 1787 में सोढ़ल नाम से बसे इस क्षेत्र को बीकानेर के महाराजा सूरतसिंह ने नियंत्रण में लिया था. इन महाराजा के नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम सूरतगढ़ रख गया. बता दें कि सूरत सिंह ने सोढ़ल नगर से रियासती व्यवस्थाओं के संचालन के लिए एक बड़े किले का निर्माण करवाया था, जिसे सूरतगढ़ का गढ़ कहा गया.

सादुलशहर विधानसभा- महाराजा गंगा सिंह के छोटे पुत्र सार्दुल सिंह के नाम पर इस सीट का नाम सादुलशहर रखा गया है.

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