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राजस्थान में गुरुओं का घोटाला, यूनिवर्सिटी पेपरलीक मामले में 9 अरेस्ट

राजस्थान में उच्च शिक्षा का बड़ा घोटाला सामने आया है. राजस्थान के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार होने के साथ ही बाजार में बिक जाता था.

यूनिवर्सिटी पेपरलीक मामले में 9 अरेस्ट यूनिवर्सिटी पेपरलीक मामले में 9 अरेस्ट

राजस्थान में उच्च शिक्षा का बड़ा घोटाला सामने आया है. राजस्थान के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार होने के साथ ही बाजार में बिक जाता था. राज्य के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने राज्य के सबसे बड़े विश्वविद्यालय राजस्थान विश्वविद्यालय के एचओडी, बीकानेर के सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल, तीन प्रोफेसरों सहित नौ लोगों को पेपरलीक मामले में गिरफ्तार किया है. इसके अलावा तीन कर्मचारी और 16 छात्र हिरासत में लिए गए हैं. आरोपियों ने बीए, एमए, बीकॉम और एमकॉम समेत कई परीक्षाओं के पेपर लीक किए थे.

राजस्थान के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का गड़बड़झाला सामने आने के बाद हर मेहनतकश छात्र हैरान है. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने हायर एजुकेशन के सौदागरों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार होने वालों में राजस्थान विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के एचओडी जगदीश जाट, बीकानेर के राजकीय महाविद्यालय के प्रिंसिपल एनएस मोदी, प्रोफेसरों में शंभुदायल, गोविंद पारिक, कालीचरण शर्मा, बीएल गुप्ता समेत नौ लोग हैं.

एसओजी ने अब तक चार मुकदमे दर्ज किए हैं और चार आज दर्ज किए जाएंगे. देर रात की कार्रवाई में राजस्थान विश्वविद्यालय के गोपनीय शाखा के कर्मचारी भी गिरफ्तार हुए हैं. एसओजी के अनुसार ये खेल लंबे समय से चल रहा है.

अब तक पेपरलीक की तीन वजहें सामने आई हैं, पहला- कमाई की लालच- एसओजी के अनुसार विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, कर्मचारियों और कुछ बुक सेलर्स के साथ मिलकर मोटी कमाई की लालच में पेपर बाजार में बेच देते थे. हालांकि इन्होंने कितना कमाया है इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है. दूसरा- अपनों की मदद का मोह- बीकानेर के खथाजूवाला सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल एनएस मोदी का बेटा निपुण मोदी एमकॉम फाइनल ईयर की परीक्षा दे रहा था. इसलिए बेटे के लिए पेपर मंगा लिया जबकि भूगोल के एचओडी दिनेश जाट की रिश्तेदार लड़की एग्जाम दे रही थी इसलिए पेपर लीक करा दिया. और तीसरा- कोचिंग संस्थानें हैं- विश्वविद्यालय के जो छात्र-छात्रा प्रोफेसरों के पास कोचिंग में पढ़ने आते थे उनको वो पेपरलीक कराते थे ताकि उनका प्रभाव बन सके और ज्यादा छात्र पढ़ने आएं.

आपको बता दें कि, राजस्थान यूनिवर्सिटी में 1200 कॉलेज हैं जिसमें आठ लाख छात्र-छात्राएं हैं. पेपर लीक की घटना रोकने के लिए पेपर सेट करने वाले प्रोफेसरों की फीस सरकार ने 6 गुणा बढ़ा दिए हैं लेकिन ये फिर भी लालच में आ जा रहे हैं. एसओजी के आईजी एमएन दिनेश के अनुसार पिछले कई दिनों में पेपरलीक की शिकायत आने के बाद प्रोफेसरों के फोन सर्विलांस पर ले रखे थे. इनमें से एक दो ने तो व्हाट्सएप पर ही पेपर मंगाए हैं. एसओजी के अनुसार करीब 13 प्रोफेसर और 27 छात्रों की जांच की जा रही है जिनकी गतिविधियां संदिग्ध पाई गई हैं. हालांकि सरकार ने अब तक दोबारा परीक्षा कराने को लेकर फैसला नहीं लिया है.

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