क्या भगवान की भी कोई जाति होती है. राजस्थान में आज भी दलितों के मंदिर प्रवेश को लेकर अगड़ी जातियों में विरोध बरकरार है. जयपुर जिले के नीमोरा गांव में दलितों को जब गांव के मंदिर में जाने से रोका तो एक दलित ने अपने घर के पास ही भगवान की मूर्ति लगा ली.
दलितों का आरोप है कि अगड़ों को इस बात पर भी आपत्ति है कि दलित ने गांव के मंदिर की मूर्ति से बड़ी मूर्ति कैसे बना ली और वहां पूजा क्यों कर रहे हैं?
जयपुर से करीब 50 किमी दूर निमोरा गांव के बाबूलाल के घर में बजरंग बली की मूर्ति लगी हुई है. गांव के लोगों ने जब बाबूलाल और उसके भाई भंवरलाल को गांव के मंदिर में पूजा करने से रोका तो इन्होने अपने घर में ही बजरंग बली की मूर्ति लगाकर टीन शेड डालकर पूजा शुरू कर दी.
मंदिर गंदा होने के डर से लगाया गया रोक
मंदिर में दलितों के प्रवेश से मंदिर गंदा होने की बात कहकर गांववालों ने इनके प्रवेश पर रोक लगा दी. इन्होंने लड़ने के बजाए उनकी बजरंग बली से बड़ी मूर्ति लगाकर और पूजा कर उनको जवाब देने का फैसला किया. 40 घर के गांव में केवल दो घर दलितों के हैं और अब ये यहीं पूजा करते हैं.
बाबूलाल खटीक का कहना है कि हमने मजबूरी बस अपने घर के जमीन पर ही बजरंगबली की मूर्ति लगा ली है, लेकिन गांव के दबंगों को यह भी पसंद नहीं है. बाबूलाल की 75 साल की मां प्यारी कहती हैं कि हमने अपने पैसे से भले ही मूर्ति लगा ली हो लेकिन गांव की अगड़ी जातियों ने हमारी पूजा करने पर रोक लगाने की कोशिश की. मूर्ति के बड़ी होने की बात कहकर घर पर पथराव करने लगे. इनका आरोप है कि इनकी पूजा को लेकर इन पर अत्याचार किया जा रहा है.
किसी का नहीं मिला साथ
जब इन्होंने पुलिस-प्रशासन से शिकायत की तो पूरे गांव में कोई इनके पक्ष में गवाही देने वाला नहीं मिला और मामला खत्म हो गया. गांव के लोग कहते हैं कि छुआछूत का मुकदमा पूरे गांव पर लगा था जो गलत था.
कोई पूरे गांव से झगड़ा क्यों करेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है. इस मसले पर गांव के लोग मीडिया के सामने कुछ नहीं बोलना चाहते हैं. लेकिन राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का कहना है कि मंदिरों में प्रवेश को लेकर बहुत कम मामले आते हैं.
फिलहाल गांव की सूरत देखने पर यह साफ हो जाता है कि यहां भेदभाव कायम है. पूरे गांव में सड़क है लेकिन दलित परिवारों के पास मकान तक नहीं है. उनके घर तक पानी की सप्लाई की व्यवस्था भी नहीं है.