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जयपुरः डेढ़ साल की बच्ची को छोड़कर कोरोना मरीजों के उपचार में जुटी नर्स

नर्सिंग से जुड़ी परिवार की एक महिला महज डेढ़ साल की अपनी बच्ची को छोड़कर घर से दूर अपनी ड्यूटी निभा रही है. पिछले दो महीने से वह घर नहीं आ सकी है और बच्ची की देखभाल उसकी दादी सुनीता कर रही हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (PTI)
प्रतीकात्मक तस्वीर (PTI)

  • दादी कर रही हैं मासूम बच्ची की देखभाल
  • वीडियो कॉल के जरिए दिखा देते हैं परिजन

कोरोना वायरस की महामारी ना केवल मानव जाति के लिए बड़ा संकट लेकर आई है, बल्कि यह संबंधों की भी बड़ी परीक्षा ले रहा है. कोरोना के खिलाफ जंग में अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मी अपने घर-परिवार से दूर एक-एक व्यक्ति की जान बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं. राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक परिवार ऐसा भी है, जिसके अधिकतर सदस्य स्वास्थ्यकर्मी हैं.

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नर्सिंग से जुड़ी परिवार की एक महिला महज डेढ़ साल की अपनी बच्ची को छोड़कर घर से दूर अपनी ड्यूटी निभा रही है. पिछले दो महीने से वह घर नहीं आ सकी है और बच्ची की देखभाल उसकी दादी सुनीता कर रही हैं. परिजन उसे वीडियो कॉल के जरिए उसके जिगर के टुकड़े का दीदार करा देते हैं. डेढ़ साल की काश्वी की मां गौरी करौली जिले के इलाकों में घूम-घूम कर कोरोना के मरीजों की पहचान कर उन्हें अस्पताल भेजने के काम में लगी हुई हैं.

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काश्वी की दादी बताती हैं कि गौरी को दिन में समय नहीं मिल पाता. वह सुबह और शाम वीडियो कॉल कर अपनी बेटी को देख लेती हैं. वह बताती हैं कि मासूम काश्वी रात को सोते समय अधिक तंग करती है, अपनी मां की तलाश करती है. वीडियो कॉल कर जब मां को देखती है, तभी सोती है. वहीं, मां गौरी ने कहा कि हम लोग सुबह से शाम तक ग्रामीण इलाकों में घूम-घूम कर कोरोना के संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उनकी जांच कराते हैं.

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उन्होंने कहा कि बच्ची की याद तो आती ही है, लेकिन इस समय हमारे लिए देश सेवा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. इसलिए घर-परिवार से दूर इस काम में लगे हुए हैं. गौरी ने कहा कि हमने इस इलाके में कई लोगों को ठीक कर घर भेज दिया है. हमारे साथ सहयोग के लिए आशा कार्यकत्री रहती हैं. गौरी के पति दुष्यंत भी एक निजी अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मी हैं, वहीं काश्वी के दादा कृष्णानंद भी सवाई मानसिंह अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में नर्सिंग स्टाफ हैं.

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