सरकार के किसानों से सीधे खरीद कर बाजार में माल बेचने के खिलाफ राजस्थान के 274 अनाज मंडियों में शनिवार से हड़ताल शुरू हो गई है. व्यापारियों ने राज्य की सभी अनाज मंडियों को बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू दिया है और आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा ज्यादा समर्थन मूल्य पर फसल खरीदकर कम दाम पर बाजार में बेचने की वजह से मंडी में व्यापारियों के पास कोई नहीं आ रहा है.
राजस्थान खाद्य व्यापारी संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि सरकार आढतियों के काम को बंद करना चाहती है, जिससे लगभग पूरे राजस्थान में 25 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं. किसानों से सीधे फसल खरीदने की वजह से किसान मंडी में नहीं आ रहे हैं और अफसर किसानों के साथ ज्यादती कर रहे हैं.
ठेकेदारों के साथ मिलकर अफसर मंडी के बजाय बाहर ही बाहर किसानों से फसल खरीद रहे हैं, जहां पर भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है. कम से कम अगर किसान मंडी में फसल लाएंगे और वहां पर सरकार खरीदेगी, इससे व्यापारी और किसान दोनों का फायदा होगा. लेकिन मंडी के बाहर समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदने और बेचने का भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है.
मसलन मूंग की फसल सरकार 52 रुपए प्रति किलो के समर्थन मूल्य पर खरीद रही है और बाजार में 44 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच रही है. ऐसे में अगर किसान से व्यापारी 47 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मूंग की फसल खरीदता है तो वह कहां बेचेगा. इस तरह से अनाज व्यापारियों का पूरा व्यवसाय ही खत्म हो रहा है.
राजस्थान के मंडियों में व्यापारियों ने शनिवार से काम बंद कर दिया है और सरकार को चेतावनी दी है कि अगर मंडी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो आगे आने वाले चुनाव में व्यापारी बीजेपी के खिलाफ जाएंगे. व्यापारियों ने आरोप लगाया कि राजस्थान ही एक ऐसा राज्य है जहां व्यापारियों से मंडी शुल्क वसूला जाता है.
इसके अलावा तिलहन पर और मूंगफली पर बाजार में व्यवसाय करने पर 0.5 फिसदी का टैक्स लगाया गया है. इससे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है. व्यापारियों ने मांग की है कि जीएसटी में 5 करोड़ से ऊपर का व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को भी 3 महीने के अंदर टैक्स भरने की सीमा पर छूट दी जाए क्योंकि अनाज के कारोबार में फायदा कम होता है और टर्नओवर ज्यादा का होता है.