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पंचायत का अनूठा फैसला, 'शौचालय नहीं तो शादी नहीं'

राजस्थान के जालोर जिले में तीन पंचायतों ने ऐतिहासिक फैसला दिया है. पंचायत ने गांव के हर घर में शौचालय अनिवार्य कर दिया है और यह नियम भी लागू कर दिया है कि जिस घर में शौचालय नहीं होगा, वहां अब शादी की इजाजत नहीं मिलेगी.

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राजस्थान के जालोर जिले में तीन पंचायतों ने ऐतिहासिक फैसला दिया है. पंचायत ने गांव के हर घर में शौचालय अनिवार्य कर दिया है और यह नियम भी लागू कर दिया है कि जिस घर में शौचालय नहीं होगा, वहां अब शादी की इजाजत नहीं मिलेगी.

'निर्मल भारत योजना' के तहत जालोर के आवलोज, वासन रटूजा और थलूड़ा गांव की पंचायतों ने अनूठा फैसला किया है. इसके तहत जिस घर में शौचालय नहीं होगा, वहां शादी समारोह नहीं हो सकेंगे.

1 हजार टॉयलेट बनाने का लक्ष्य
आवलोज पंचायत के अधीन करीब 5 हजार की आबादी है. गांव के लोग प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए अपने गांव को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे है. गांव मे करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है और रटूजा और थलूड़ा गांव मे भी 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है.

संरपच के साथ ग्रामीण भी घर-घर जाकर शौचालय बनवा रहे हैं. ग्रामीणों ने तय किया है कि चारों गांवों में कुल एक हजार टॉयलेट बनने चाहिए. इनमें से 600 टॉयलेट बन चुके हैं. पहले स्तर पर शेष बचे 400 टॉयलेट बनाने के लिए कमेटी ने 20 जुलाई तक का समय दिया है. उन्होंने बताया कि 20 जुलाई तक 90 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति का लक्ष्य है.

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