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रूसी सेना में शामिल भारतीय अबतक नहीं लौटे स्वदेश, पीएम मोदी के दौरे पर हुई थी बातचीत

पुतिन की तरफ से आश्वासन दिया गया था कि भारतीय युवकों को जल्द से जल्द भारत भेजा जाएगा. लेकिन पीएम मोदी से वार्ता के दो हफ्ते बीत जाने के बावजूद अभी तक ना तो रूस की सरकार की तरफ से और ना ही सेना की तरफ से भारतीय युवकों को छोड़ने के लिए कोई सकारात्मक पहल की गई है.

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रूस-यूक्रेन युद्ध में भारतीय युवकों की वापसी का इंतजार
रूस-यूक्रेन युद्ध में भारतीय युवकों की वापसी का इंतजार

रूस और यूक्रेन युद्ध में अब तक हजारों सैनिक मारे जा चुके हैं. ब्रिटेन सरकार द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के मई-जून में ही 70 हजार के करीब रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं, हालांकि रूसी सरकार ने अब तक मारे गए सैनिकों की कुल संख्या का खुलासा नहीं किया है लेकिन एक अनुमान के मुताबिक हर दिन 200 से ज्यादा सैनिक अपनी जान गंवा रहे हैं. 

बताया जा रहा है कि रूस और यूक्रेन युद्ध में भारत के 100 से अधिक बेरोजगार युवक रूसी सेना में भर्ती हो चुके हैं. भारत के विदेश मंत्रालय ने कम से कम 50 भारतीय परिवारों द्वारा सरकार से संपर्क साध कर बताया है कि उनके सदस्य इस वक्त रूसी सेना में कार्यरत हैं. परिवारों ने भारत सरकार से अपने बच्चों की घर वापसी के लिए गुहार लगाई है. 

पीएम मोदी और पुतिन के बीच हो चुकी है बात 

ज्यादातर भारतीय युवक दुबई, मॉस्को सहित कई दूसरे देशों में बैठे ट्रैवल एजेंट्स के जरिए रूसी सेना में भर्ती हुए. हरियाणा के करनाल और पंजाब के गुरदासपुर के परिवारों ने कहा है कि युवकों को जेल का डर दिखाकर जबरन सेना में भर्ती किया गया. यूक्रेन युद्ध में मारे जा चुके अमृतसर के तेजपाल के परिवार ने कहा है कि वह अपनी मर्जी से रूस की सेना में भर्ती हुआ. क्योंकि ज्यादातर युवकों और उनके परिवार को लगता है कि पासपोर्ट पर रूस की मुहर लगने से यूरोपीय देशों में जाना आसान होगा.

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हरियाणा और पंजाब से ताल्लुक रखने वाले युवकों के परिवारों के मुताबिक ज्यादातर युवक पिछले साल दिसंबर और इस साल के फरवरी माह के दौरान मास्को रवाना हुए जहां से उन्हें हेल्पर और कुक के तौर पर सेना में भर्ती कर लिया गया. कुछ लोगों का आरोप है कि वह बेलारूस जाना चाहते थे लेकिन उनके पास वीजा नहीं था इसलिए उनको गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में रूसी सेना में भर्ती किया गया.

युवकों की घर वापसी को लेकर परिवार चिंतित

रूस की सेना में भर्ती किए गए पंजाब, हरियाणा समेत देश के कई राज्यों के युवक और उनके परिवारों की नींद उड़ी हुई है. चिंता इसलिए भी है क्योंकि रूस की सरकार के आश्वासन के बावजूद भी इन युवकों को डिस्चार्ज नहीं किया गया. इस मसले पर दो हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बात भी चुकी है.

पुतिन की तरफ से आश्वासन दिया गया था कि इन लोगों को जल्द भारत भेजा जाएगा. लेकिन वार्ता के दो हफ्ते बीत जाने के बावजूद अभी तक ना तो रूस की सरकार की तरफ से और ना ही सेना की तरफ से उनको छोड़ने के लिए कोई सकारात्मक पहल की गई है.

हरियाणा और पंजाब से ताल्लुक रखने वाले युवकों के परिवार उनकी सलामती की दुआएं मांग रहे हैं. सभी को उम्मीद है कि वह जल्दी घर वापस आ जाएंगे. वहीं भारत की सरकार ने एक बार फिर से रूस की सरकार से संपर्क किया है और कहा है कि सेना में अब भारतीय युवकों की भर्ती बंद हो. 

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अमृतसर और गुरदासपुर से ताल्लुक रखने वाले गगनदीप और हरप्रीत के परिवार के सदस्यों के मुताबिक व्लादिमीर पुतिन के आश्वासन के बावजूद भी भारतीय युवकों को अब भी मोर्चे पर भेजा जाना जारी है. उनसे रातभर बंकर और कब्रें खुदवाई जा रही हैं. 

भारतीय युवकों से कब्र और बंकर खुदवाए जा रहे हैं 

पंजाब में विदेश मामलों के मंत्री कुलदीप धालीवाल ने रूस सरकार की आलोचना करते हुए भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह इन युवकों की रिहाई के लिए फिर से कोशिश करे.

पंजाब और हरियाणा में लगातार बेरोजगारी का ग्राफ आसमान छू रहा है. पंजाब में निवेश न आने की वजह से निजी क्षेत्र की नौकरियां कम हो रही हैं तो वहीं दोनों राज्यों में सरकारी नौकरियों में की गई कटौती बेरोजगारी बढ़ा रही है. 

बेरोजगारी की वजह से भारतीय युवक ले रहे हैं रिस्क 

पंजाब के रोजगार कार्यालय में 20 लाख से ज्यादा बेरोजगार पंजीकृत हैं तो पड़ोसी राज्य हरियाणा में 13 लाख से ज्यादा युवक युवतियां नौकरी की तलाश में हैं. यही कारण है कि नौकरी की तलाश में युवक अपनी जान जोखिम में डालने से भी नही कतरा रहे हैं. फिर चाहे रूस की सेना में भर्ती होने के मामले हो या फिर डंकी रूट के जरिए अमेरिका या यूरोपीय देशों में पहुंचने की कोशिश.

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