अमृतसर स्थित गुरु नानक देव विश्वविद्यालय ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (KIUG) 2025 के आयोजन को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करनजीत सिंह की ओर से युवा मामले एवं खेल मंत्रालय को भेजे गए पत्र में प्रतियोगिता के दौरान नियमों के उल्लंघन, अनुचित प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट), अयोग्य खिलाड़ियों की भागीदारी और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं. पत्र में मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है.
पत्र में कहा गया है कि खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स केवल एक वार्षिक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि छात्र-खिलाड़ियों के भविष्य को तय करने वाला राष्ट्रीय मंच है. ऐसे में इसमें पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है. विश्वविद्यालय का आरोप है कि प्रतियोगिता के दौरान बार-बार आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद आयोजन समिति ने न तो कोई सुधारात्मक कदम उठाया और न ही विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया.
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वेटलिफ्टिंग में अयोग्य भागीदारी का आरोप
पहली आपत्ति वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता से जुड़ी है. पत्र के अनुसार, अंडर-58 किलोग्राम भार वर्ग में एक निजी विश्वविद्यालय की ओर से भाग लेने वाली खिलाड़ी ओडिशा की एक विद्युत वितरण कंपनी में स्थायी कर्मचारी हैं. ऐसे में वे KIUG के छात्र-खिलाड़ी पात्रता मानकों पर खरी नहीं उतरतीं. इसके बावजूद उन्हें प्रतियोगिता में भाग लेने दिया गया और उन्होंने पदक भी हासिल किया. विश्वविद्यालय ने उनका पदक रद्द करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है.
शूटिंग स्पर्धाओं में नियमों की अनदेखी
दूसरी बड़ी आपत्ति शूटिंग प्रतियोगिताओं को लेकर दर्ज कराई गई है. पत्र में कहा गया है कि 10 मीटर महिला एयर पिस्टल और एयर राइफल स्पर्धाओं में नियमों का उल्लंघन हुआ. AIU और KIUG नियमों के अनुसार, व्यक्तिगत स्पर्धाओं में केवल अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय शूटिंग चैंपियनशिप 2024-25 के शीर्ष आठ खिलाड़ी ही पात्र होते हैं, जबकि रिप्लेसमेंट केवल टीम इवेंट्स में ही अनुमन्य है. इसके बावजूद एक योग्य खिलाड़ी को हटाकर दूसरी खिलाड़ी को प्रतिस्थापित किया गया, जो नियमों के खिलाफ है.
इतना ही नहीं, एक अन्य मामले में 21वां स्थान प्राप्त करने वाली खिलाड़ी को व्यक्तिगत स्पर्धा में भाग लेने दिया गया और उन्होंने स्वर्ण पदक भी जीत लिया. विश्वविद्यालय का कहना है कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि निष्पक्ष खेल भावना पर भी गंभीर आघात है.
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अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रतियोगिता के दौरान कुछ खेलों में राष्ट्रीय कोचों और महासंघ अधिकारियों ने विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों पर दबाव बनाया कि वे प्रतियोगिता बीच में ही छोड़ दें. इसे विश्वविद्यालय ने अनुचित हस्तक्षेप और खिलाड़ियों की अकादमिक व खेल प्रतिबद्धताओं के प्रति असम्मान बताया है.
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय ने मंत्रालय से मांग की है कि सभी विवादित पदकों को रद्द किया जाए, अयोग्य खिलाड़ियों की भागीदारी की जांच हो और जिन अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार किया, उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए. विश्वविद्यालय ने विश्वास जताया है कि मंत्रालय सभी शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा करेगा और खेलो इंडिया की मूल भावना-न्याय और समान अवसर-को बहाल करेगा.