पंजाब सरकार ने बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा/राहत राशि दी है. इसके तहत सरकार की ओर से राज्य के लिए 209 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी की गई है. इसमें से संगरूर जिले के बाढ़ पीड़ितों को 3.50 करोड़ रुपये बांटे जाएंगे. पंजाब के वित्त और योजना मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने धूरी निर्वाचन क्षेत्र में आठ बाढ़ प्रभावित परिवारों को स्वीकृति पत्र सौंपकर मुआवजा बांटने की शुरुआत की.
631 किसानों में 5.70 करोड़ रुपये के चेक बांटे
उन्होंने कहा कि सीएम भगवंत मान ने अजनाला में 631 किसानों को 5.70 करोड़ रुपये के चेक देकर मिशन पुनर्वास की शुरुआत की थी. देश में पहली बार किसानों को प्रति एकड़ 20,000 रुपये मुआवजा दिया गया है. पंजाब सरकार हर सुख-दुख में लोगों के साथ खड़ी है. भारी बारिश और बाढ़ के कारण पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर फसलें खराब हो गई थीं. कई लोगों के घर और अन्य इमारतें ढह गई थीं. प्रत्येक प्रभावित परिवार को नुकसान का आकलन करने के बाद राहत राशि दी जाएगी. पहली बार, प्रत्येक क्षतिग्रस्त घर को 40,000 रुपये मिलेंगे, जबकि पहले केवल 4,000 रुपये मिलते थे. किसानों को फसल के नुकसान के लिए प्रति एकड़ 20,000 रुपये मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि पंजाब और पंजाबी प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों के साथ हमेशा खड़े रहे हैं. हालांकि, केंद्र सरकार हर क्षेत्र में पंजाब और पंजाबियों के साथ भेदभाव करती है. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह पंजाब दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 1600 करोड़ रुपये जल्द से जल्द जारी करे. उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र द्वारा जारी किए गए 240 करोड़ रुपये वार्षिक किश्त का हिस्सा हैं.
अग्रिम तैयारी से नियंत्रित रही स्थिति
चीमा ने दावा किया कि पंजाब सरकार ने लोगों के सहयोग से पूरी ताकत के साथ बाढ़ का मुकाबला किया. यदि समय पर बचाव और राहत कार्य शुरू न किए गए होते, तो नुकसान बहुत अधिक होता. संगरूर जिला प्रशासन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि घग्गर नदी में 747 फीट पानी होने पर आमतौर पर तटबंध टूट जाता था, लेकिन इस बार 755 फीट पानी होने के बावजूद स्थिति नियंत्रण में रही.
इससे पहले, डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा ने संगरूर जिले में बाढ़ से निपटने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी और मुआवजा राशि जारी करने के लिए पंजाब सरकार का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से व्यवस्थाएं की गई थीं. भारी बारिश के बावजूद, संगरूर जिले से गुजरने वाली घग्गर नदी के 41 किलोमीटर क्षेत्र में एक भी तटबंध नहीं टूटने दिया गया.