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पंजाब में सरकारी डॉक्टरों का आंदोलन स्थगित, सरकार के आश्वासन पर जताया भरोसा

पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (पीसीएमएसए) ने सरकार के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए 20 जनवरी से प्रस्तावित हड़ताल को 23 जनवरी तक स्थगित कर दिया है. संगठन डीएसीपी बहाली और डॉक्टरों की सुरक्षा में सुधार की मांग कर रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने अधिसूचना जल्द जारी करने का वादा किया है. अगली बैठक 23 जनवरी को होगी.

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AI जेनरेटेड (सांकेतिक तस्वीर).
AI जेनरेटेड (सांकेतिक तस्वीर).

पंजाब में सरकारी डॉक्टरों के संगठन पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (पीसीएमएसए) ने अपनी प्रस्तावित हड़ताल को 23 जनवरी तक टाल दिया है. यह निर्णय रविवार को मोगा में हुई संगठन की आम सभा की बैठक में लिया गया. इससे पहले एसोसिएशन ने 20 जनवरी से अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी.

डॉक्टरों की प्रमुख मांगें

दरअसल, पीसीएमएसए के करीब 2500 डॉक्टर डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेसन (डीएसीपी) की बहाली को लेकर अधिसूचना जारी करने और डॉक्टरों के लिए बेहतर सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं. एसोसिएशन का कहना है कि डॉक्टरों को करियर प्रगति में लंबे समय से बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है और सुरक्षा उपायों की कमी से उनकी कार्य स्थितियां प्रभावित हो रही हैं.

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सरकार और संगठन के बीच चर्चा

पीसीएमएसए के अध्यक्ष डॉ. अखिल सरीन ने बताया कि 17 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई. इस चर्चा के दौरान विभाग ने डॉक्टरों की मांगों पर सहमति जताई और आश्वासन दिया कि डीएसीपी बहाली से जुड़ी अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने भरोसा दिलाया कि अधिसूचना इसी सप्ताह के पहले हिस्से में आ सकती है.

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आंदोलन स्थगित करने का निर्णय

सरकार के इस आश्वासन पर भरोसा जताते हुए एसोसिएशन ने 20 जनवरी से शुरू होने वाले आंदोलन को चार दिन के लिए यानी 23 जनवरी तक स्थगित करने का फैसला किया है. इस दौरान पीसीएमएसए सरकार के आश्वासन की प्रगति पर नजर रखेगा. पीसीएमएसए पटियाला इकाई के अध्यक्ष डॉ. सुमीत सिंह ने बताया कि संगठन की अगली आम सभा 23 जनवरी को होगी. यदि सरकार द्वारा वादे के मुताबिक अधिसूचना जारी नहीं की जाती है, तो आगे की रणनीति तय की जाएगी.

सरकार के प्रयासों की सराहना

डॉ. सरीन ने कहा कि एसोसिएशन सरकार के ईमानदार प्रयासों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करती है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन अपनी मांगों को लेकर गंभीर है और यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा. यह निर्णय डॉक्टरों और सरकार के बीच संवाद को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद की जा सकती है.

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