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केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब के किसानों की 26 नवंबर को दिल्ली कूच की तैयारी

पंजाब में जारी किसान आंदोलन की वजह से रेलवे के साथ ही राज्य सरकार और प्रदेश की इंडस्ट्रीज को अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह की अपील के बाद करीब 30 किसान संगठनों ने अगले 15 दिनों के लिए रेलवे मार्ग खाली कर दिए हैं.

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ हैं पंजाब के किसान (फाइल फोटो) केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ हैं पंजाब के किसान (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जेनेरेटर, गैस सिलेंडर, लंगर का सामान साथ ले कर चलेंगे किसान
  • रास्ते में जहां रोका गया वहीं बेमियादी धरने पर बैठने का ऐलान
  • आठ हफ्ते से चल रहे आंदोलन के कारण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब के किसानों ने करीब आठ हफ्ते से सख्त तेवर अपना रखे हैं. इस अवधि में कई जगह रेलवे ट्रैक पर किसानों के धरने से पंजाब में रेल यातायात पर बुरा असर पड़ा. मालगाड़ियों के न चलने की वजह से पंजाब को कोयला, फर्टिलाइजर्स जैसी कई जरूरी चीजों की किल्लत का सामना करना पड़ा.

कोयले की सप्लाई बाधित होने से पंजाब में थर्मल पावर स्टेशन्स का कामकाज प्रभावित हुआ जिससे राज्य में बिजली का उत्पादन घट गया. इस बीच, भारतीय किसान यूनियन उगराहां ने ऐलान किया है कि पंजाब के किसान हर हाल में 26 नवंबर को दिल्ली के लिए कूच करेंगे जहां पर केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा.   

26 नवंबर को हर हाल में दिल्ली कूच करने का ऐलान

भारतीय किसान यूनियन उगराहां के अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह उगराहां ने बताया कि पंजाब के पटियाला के धनौर और सिरसा के डबवाली बॉर्डर से पंजाब से हरियाणा में दाखिल होते हुए किसान आगे दिल्ली की ओर बढ़ेंगे, जहां भी हरियाणा सरकार या दिल्ली पुलिस की तरफ से किसानों को रोका जाएगा तो वहीं पर ही वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे. इसके लिए वो अपने साथ जनरेटर, गैस सिलेंडर, बिस्तर और खाने के लिए लंगर की पूरी व्यवस्था साथ लेकर चलेंगे.

वहीं दूसरी और हरियाणा के किसानों ने भी 26-27 नवंबर को होने वाले दिल्ली कूच के किसानों के कार्यक्रम को समर्थन देने का ऐलान किया है. एहतियात के तौर पर सोमवार देर रात से ही हरियाणा पुलिस ने राज्य की अलग-अलग जगहों से किसान संगठनों के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया. कई किसान नेताओं को उनके घर पर ही नजरबंद कर दिया गया है. हालांकि इसके बावजूद हरियाणा के किसान संगठन दावा कर रहे हैं कि वो हर हाल में दिल्ली का रुख करेंगे और अपने आंदोलन को कामयाब बनाएंगे.

किसान आंदोलन से कितना नुकसान? 

हालात ये हैं कि पंजाब में जारी किसान आंदोलन की वजह से रेलवे के साथ ही राज्य सरकार और प्रदेश की इंडस्ट्रीज को अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है. हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह की अपील के बाद करीब 30 किसान संगठनों ने अगले 15 दिनों के लिए रेलवे मार्ग खाली कर दिए हैं और यात्री और मालगाड़ियों को चलाए जाने पर हामी भर दी है. लेकिन इसके बावजूद अमृतसर के जंडियाला गुरु में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी नाम का बड़ा किसान संगठन रेलवे ट्रैक को जाम करके बैठा है और वहां से यात्री गाड़ियों का संचालन नहीं होने दे रहा. हालांकि मालगाड़ियों को चलने देने को लेकर पंजाब के तमाम किसान संगठन राजी हैं.  

अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो किसान यूनियनों की ओर से पिछले करीब दो महीने से चलाए जा रहे आंदोलन के तहत मालगाड़ियों के 3,850 रैक पर लदान नहीं हो सका और 2352 यात्री ट्रेनों को रद्द करना पड़ा. इसका खामियाजा आम लोगों के साथ राज्य सरकार को भी उठाना पड़ा. सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे को 2,200 करोड़ रुपये का हुआ है. आंदोलन के कारण पंजाब के बाहर जरूरी सामान के 230 रैक फंसे रहे. इनमें 78 कोयला, 34 खाद, आठ-आठ सीमेंट, पेट्रोलियम पदार्थो के अलावा 102 रैक अन्य सामग्री के थे.

पंजाब के लुधियाना को इंडस्ट्री हब भी कहा जाता है. किसानों के आंदोलन के चलते पंजाब की कार्पोरेट इंडस्ट्री का कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित हुआ.

लुधियाना के ढंडारी स्थित बने ड्राई पोर्ट पर कंटेनर फंसे होने के चलते इंडस्ट्रीज काफी परेशान हैं. किसानों के आंदोलन के चलते माल गाड़ियों और पैसेंजर ट्रेन बंद होने और केंद्र सरकार व पंजाब सरकार में आपसी सहमति न बन पाने की वजह से इंडस्ट्री  दोहरी मार झेल रहे हैं. उद्यमी रजनीश आहूजा के मुताबिक कंटेनरों को रोककर ना तो केंद्र सरकार का नुकसान हो रहा है और ना ही पंजाब सरकार का, इसमें पंजाब के लोगों का नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि तकरीबन 22 हजार कंटेनर फंसे हुए हैं. 

उद्यमियों का कहना है कि यही हालत रहे तो इंडस्ट्रीज को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ सकता है. उद्यमी रजनीश आहूजा ने ये भी कहा कि पंजाब में इंडस्ट्री को बचाने के लिए जल्दी ही कोई एक्शन लेना चाहिए. एक अनुमान के मुताबिक पंजाब की इंडस्ट्री को किसान आंदोलन की वजह से करीब 13,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है. 

रेलवे ट्रैक खाली करने का दावा

पंजाब में किसान आंदोलन को लीड कर रहे बड़े संगठन भारतीय किसान यूनियन उगराहां के अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह उगराहां ने दावा किया कि मालगाड़ियों और यात्री गाड़ियों के लिए रेलवे ट्रैक खाली किए जा चुके हैं. जो किसान संगठन अभी भी रेलवे ट्रैक खाली ना करने पर अड़े हैं, उनसे भी रेल यातायात की बहाली के लिए अपील की जा रही है. 

कुल मिलाकर किसान आंदोलन साख का सवाल बन गया लगता है. अगर मुख्य तौर पर पंजाब के किसान केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध की अपनी जिद पर अड़े रहे और केंद्र सरकार ने किसानों को मनाने की दिशा में कोई रास्ता नहीं निकाला तो पंजाब की माली हालत पर तो बुरा असर पड़ेगा ही, साथ ही इसके असर से देश की अर्थव्यवस्था भी अछूती नहीं रह पाएगी.

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